
नई दिल्ली: संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने सोमवार को वक्फ संशोधन विधेयक को 14 परिवर्तनों के साथ मंजूरी दे दी। विपक्षी सांसदों द्वारा प्रस्तुत किए गए 44 संशोधनों को अस्वीकार कर दिया गया। समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने बताया कि स्वीकृत संशोधन कानून को और अधिक प्रभावी बनाएंगे।
विपक्षी सांसदों ने बैठक की कार्यवाही की आलोचना करते हुए पाल पर “लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने” का आरोप लगाया। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, “यह एक दिखावटी बैठक थी। हमें सुना तक नहीं गया। पाल ने तानाशाही तरीके से काम किया है।” हालांकि, पाल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक थी और बहुमत के जरिए ही फैसला लिया गया।
समिति के समक्ष कुल 44 संशोधन प्रस्तावित किए गए थे, जिनमें से 14 को मंजूरी दी गई। भाजपा सांसदों द्वारा प्रस्तुत सभी 10 संशोधनों को स्वीकार किया गया, जबकि विपक्ष के सभी प्रस्तावों को मतदान के बाद खारिज कर दिया गया। विपक्ष द्वारा पेश किए गए सभी संशोधन 10-16 के मतों से खारिज हुए, जबकि भाजपा के सभी संशोधनों को 16-10 मतों से स्वीकार किया गया।
विधेयक में किए गए महत्वपूर्ण संशोधनों में से एक यह है कि वर्तमान कानून में मौजूद ‘वक्फ बाय यूजर’ के आधार पर मौजूदा वक्फ संपत्तियों को चुनौती नहीं दी जा सकती, यदि इन संपत्तियों का उपयोग धार्मिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा हो।
समिति की अंतिम रिपोर्ट आगामी बजट सत्र में सदन में प्रस्तुत की जाएगी।



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