जबलपुर क्रूज हादसे का अपडेट, गोताखोरों और सेना की मदद से तलाशी अभियान तेज

जबलपुर। में स्थित बरगी डैम में गुरुवार शाम हुए भीषण क्रूज हादसे में 9 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के तुरंत बाद शुरू किए गए बचाव अभियान में 24 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि 9 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। यह हादसा उस समय हुआ जब अचानक आए तेज तूफान और 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं के कारण यात्रियों से भरा क्रूज किनारे से करीब 300 मीटर की दूरी पर पलट गया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और जिला प्रशासन तथा सुरक्षा बल लापता लोगों की तलाश में युद्ध स्तर पर जुटे हुए हैं।

बचाव अभियान और घटनास्थल का दृश्य

हादसे के बाद से ही बचाव दल लगातार राहत कार्य में जुटा है। शुरुआती दौर में राज्य आपदा मोचन बल की टीमों ने कई यात्रियों को बचाया, लेकिन रात के समय खराब मौसम और अंधेरे के कारण राहत कार्य प्रभावित हुआ। शुक्रवार सुबह 8 बजकर 11 मिनट पर प्राप्त जानकारी के अनुसार दो और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या 9 हो गई है। डैम में डूबे क्रूज को बाहर निकालने के लिए हाइड्रॉलिक मशीनों और पोकलेन का उपयोग किया जा रहा है। 20 फीट गहरे पानी में डूबे इस क्रूज का पता लगाने के लिए ड्रोन कैमरों का भी सहारा लिया गया है।

मृतकों की पहचान और परिजनों की स्थिति

अब तक 9 शव बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें से 8 की पहचान कर ली गई है। मृतकों में श्रीमती नीतू सोनी (43), श्रीमती सौभाग्यम अलागन (42), श्रीमती मधुर मैसी (62), श्रीमती काकुलाझी (38), श्रीमती रेशमा सैयद (66), शमीम नकवी (66), मरिना (39) और त्रिशान (4) शामिल हैं। इसके अलावा लापता परिजनों के इंतजार में लोगों की आंखें नम हैं। प्रदीप कुमार जैसे कई लोग अपने लापता परिवार के सदस्यों की खबर का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। राहत और बचाव टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं ताकि अनिश्चितता का यह माहौल खत्म हो सके।

क्रूज की क्षमता और सुरक्षा के दावे

पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह क्रूज वर्ष 2006 में तैयार किया गया था। इसकी अधिकतम क्षमता 60 यात्रियों की है, लेकिन हादसे के समय इस पर 40 से 45 लोग सवार थे। चश्मदीदों का यह भी कहना है कि क्रूज पर 11 लोग बिना टिकट के सवार थे और किसी भी यात्री ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी हुई थी। क्रूज के पायलट महेश ने बताया कि अचानक आए तेज तूफान के कारण क्रूज अनियंत्रित हो गया और 10 साल के अनुभव के बावजूद किसी को भी संभलने का मौका नहीं मिला।

एक परिवार के 15 सदस्य थे शामिल

इस हादसे ने ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया के ए3 सेक्शन में कार्यरत कामराज आर्य के परिवार को गहरा सदमा दिया है। कामराज अपने 15 सदस्यों के साथ घूमने गए थे। उनके माता-पिता किनारे पर ही रुक गए थे, जबकि उनकी पत्नी, भाभी और बच्चे क्रूज में सवार हुए। कामराज के एक बेटे को बचा लिया गया है, लेकिन कामराज, उनकी पत्नी और एक अन्य बेटा अभी भी लापता हैं। कर्नाटक के मूल निवासी इस परिवार की तलाश तेजी से की जा रही है और प्रशासन द्वारा हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

सेना और बाहरी टीमों की तैनाती

हादसे की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन के साथ राष्ट्रीय स्तर के बचाव दलों को भी तैनात किया गया है। सेना की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और बचाव कार्य का नेतृत्व कर रही हैं। हैदराबाद से एक विशेष टीम और हेलिकॉप्टर को रवाना किया गया है। कोलकाता से भी पैरामिलिट्री की एक विशेष टीम जबलपुर पहुंच चुकी है। गोताखोर और एनडीआरएफ की टीम भी लगातार जलकुंभी और गहरे पानी में खोजबीन कर रही है। प्रशासन ने लापता लोगों की पूरी सूची तैयार की है और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

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