मुख्यमंत्री कृषक मित्र योजना के नाम पर 73 लाख रुपये का बड़ा वित्तीय फर्जीवाड़ा

जबलपुर। सागर संभाग में विद्युत वितरण कंपनी के एक अधिकारी पर वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला सामने आया है। यहां तैनात एक सहायक अभियंता ने नियमों का उल्लंघन करते हुए बिना कार्य कराए स्टोर से 73 लाख रुपये से अधिक के ट्रांसफार्मर और अन्य विद्युत उपकरण जारी करवा लिए। इस गंभीर लापरवाही और अनियमितता से कंपनी को सीधे तौर पर आर्थिक नुकसान हुआ है। प्रबंधन अब इस मामले में दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कानूनी तैयारी कर रहा है।

​मुख्यमंत्री कृषक मित्र योजना में नियमों की अनदेखी

​यह पूरा मामला राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कृषक मित्र योजना से जुड़ा हुआ है। इस योजना के तहत किसानों को खेतों में सिंचाई के लिए पंप कनेक्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। योजना के प्रावधानों के अनुसार, इसका लाभ लेने के लिए लाभार्थी किसान को प्रस्तावित लागत का 50 प्रतिशत अंशदान जमा करना अनिवार्य होता है। राशि जमा होने और वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद ही स्टोर से सामग्री प्रदान की जाती है, लेकिन सहायक अभियंता ने इन सभी नियमों को ताक पर रख दिया।

​बिना वर्क ऑर्डर और अंशदान के सामग्री जारी

​जांच में यह तथ्य सामने आया है कि लगभग 89 किसानों के नाम पर बिना कोई वर्क ऑर्डर जारी किए ही लगभग 73 लाख रुपये मूल्य के स्पर ट्रांसफार्मर और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री स्टोर से निकाल ली गई। चौंकाने वाली बात यह है कि इन 89 किसानों में से कई किसानों ने अपना अंशदान तक जमा नहीं किया था। अंशदान जमा न होने के कारण संबंधित स्थल पर कार्य आज तक प्रारंभ नहीं हो सका। इसके बावजूद सामग्री का स्टोर से निकल जाना बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।

​जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन

​इस पूरी घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने के लिए विद्युत कंपनी ने एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस जांच समिति में मुख्य अभियंता पीके क्षत्री, पीके अग्रवाल और नीरज कुचिया को शामिल किया गया है। समिति को मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद संबंधित सहायक अभियंता और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय और पुलिस कार्रवाई की जाएगी।

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