


मध्य प्रदेश के कटनी जिले का करौंदी गांव भारत का भौगोलिक केंद्र बिंदु
मध्य प्रदेश के कटनी जिले में स्थित करौंदी गांव भारत का भौगोलिक केंद्र बिंदु माना जाता है। यह गांव न केवल अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी अचंभित करने वाली भौगोलिक स्थिति इसे विशेष बनाती है।भौगोलिक विशिष्टता
करौंदी गांव, भारत के नक्शे के पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण अक्षांश और देशांतर के केंद्र बिंदु पर स्थित है। यह स्थल भारत के सम्पूर्ण भौगोलिक क्षेत्र का संतुलन बिंदु बनाता है। भूगोलविदों के अनुसार, इस स्थान को भारत के ‘शून्य केंद्र’ के रूप में परिभाषित किया गया है, जहां से देश के प्रत्येक कोने की दूरी लगभग समान है।अचंभित खगोलीय महत्व
खगोलविदों के अनुसार, करौंदी की स्थिति इतनी सटीक है कि इसे जीपीएस प्रणाली और भौगोलिक अनुसंधान में एक मानक बिंदु के रूप में उपयोग किया जा सकता है। यह बिंदु 23° 26′ उत्तरी अक्षांश और 80° 0′ पूर्वी देशांतर के निकट स्थित है, जो भारत के केंद्र का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करता है।
करौंदी गांव का यह विशेष महत्व 20वीं शताब्दी में भूगोल और खगोलशास्त्र के विशेषज्ञों द्वारा खोजा गया। भारतीय भूगोल सर्वेक्षण (Survey of India) द्वारा किए गए अध्ययन में यह निष्कर्ष निकला कि यह गांव भारत के भूगोल का केंद्र बिंदु है।
करौंदी गांव, जो मुख्यतः ग्रामीण और कृषि प्रधान क्षेत्र है, अब अपने भौगोलिक महत्व के कारण एक पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है। स्थानीय प्रशासन द्वारा यहां भौगोलिक केंद्र के स्मारक और एक भौगोलिक विज्ञान केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई है, जिससे इस क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हो सके।
गांव के आसपास की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर इसे पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाती है। यह स्थान न केवल खगोलविदों और भूगोलविदों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह ऐतिहासिक पर्यटन और शैक्षणिक यात्राओं का भी केंद्र बनता जा रहा है।




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