शहडोल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रावासों की बदहाली एक बार फिर सुर्खियां बटोर रही है। ताजा सनसनीखेज मामला गोहपारू स्थित शासकीय कन्या छात्रावास (माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर) से सामने आया है, जहां 32 छात्राएं शनिवार तड़के करीब 3:00 बजे छात्रावास प्रबंधन की लापरवाही और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के खिलाफ बगावत कर दीवार लांघकर बाहर निकल गईं।
🪳 कीड़े वाला खाना और जर्जर कमरों से थीं त्रस्त
लल्लूराम न्यूज़ की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा छात्रावास वर्तमान में एक किराए के पुराने और जर्जर भवन में संचालित हो रहा है। छात्राओं का आरोप है कि पिछले काफी समय से उन्हें अत्यंत घटिया और बेस्वाद भोजन परोसा जा रहा था, जिसमें कई बार कीड़े भी मिले। भवन में पानी की किल्लत, टूटी खिड़कियां-दरवाजे और सुरक्षा इंतजाम बेहद लचर थे। बार-बार वार्डन (अधीक्षिका) से शिकायत करने के बाद भी जब कोई सुधार नहीं हुआ, तो छात्राओं ने खुद अपनी शिकायत सीधे शहडोल जिला कलेक्टर के पास ले जाने का ऐतिहासिक फैसला किया।
👣 घने अंधेरे में 16 किलोमीटर का खतरनाक सफर
घने अंधेरे और जंगली रास्तों की परवाह न करते हुए, ये छात्राएं शहडोल जिला मुख्यालय (कलेक्ट्रेट) की ओर पैदल ही चल पड़ीं। उन्होंने देखते ही देखते 16 किलोमीटर से अधिक की दूरी पैदल तय कर ली और सुबह होते-होते शहडोल से करीब 8 किलोमीटर पहले स्थित निपानिया गांव तक पहुंच गईं।
🚌 प्रशासन के फूले हाथ-पांव, रास्ते में रोका
सुबह जब ग्रामीणों ने इतनी बड़ी संख्या में स्कूली छात्राओं को सड़क पर पैदल मार्च करते देखा, तो तुरंत स्थानीय पुलिस और प्रशासन को सूचित किया। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, सूचना मिलते ही जनजातीय कार्य विभाग के डिप्टी कमिश्नर आनंद राय सिन्हा और पुलिस बल वाहनों के साथ मौके पर दौड़े। अधिकारियों ने बीच सड़क पर ही छात्राओं को रोका।
शुरुआत में छात्राएं वापस लौटने को तैयार नहीं थीं और कलेक्टर से ही मिलने की जिद पर अड़ी रहीं। हालांकि, अधिकारियों द्वारा वार्डन के खिलाफ तुरंत दंडात्मक कार्रवाई करने और 3 दिनों के भीतर नया भवन व शुद्ध भोजन सुनिश्चित करने के लिखित आश्वासन के बाद छात्राएं शांत हुईं। प्रशासन ने उनके लिए विशेष बसों का इंतजाम किया और उन्हें वापस गोहपारू छात्रावास भेजा।
⚠️ दो महीने में 5वीं घटना: व्यवस्था पर खड़े हुए बड़े सवाल
अमर उजाला की एक तीखी रिपोर्ट के मुताबिक, शहडोल जिले में पिछले दो महीनों के भीतर किसी छात्र या छात्राओं के हॉस्टल छोड़कर सड़क पर उतरने की यह 5वीं बड़ी घटना है। इससे पहले 7 अक्टूबर को भी जैतपुर क्षेत्र के विरौड़ी एकलव्य छात्रावास से 150 से अधिक छात्र 60 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकल पड़े थे। जिले के आदिवासी छात्रावासों में बार-बार हो रहे इस तरह के विद्रोह से साफ है कि विभाग के जमीनी स्तर के अधिकारी निरीक्षण (Inspection) करने में पूरी तरह फेल साबित हो रहे हैं।