विशेष संवाददाता, नई दिल्ली/वाशिंगटन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कच्चे तेल के आयात को लेकर लिया गया एक अप्रत्याशित फैसला भारत के लिए व्यापारिक और आर्थिक मोर्चे पर बहुत बड़ी राहत लेकर आया है। ट्रंप प्रशासन ने रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर १००% तक दंडात्मक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने के अपने ही कानून को अस्थायी रूप से निलंबित (Waive) कर दिया है। इस कदम से भारत के अरबों डॉलर के अमेरिकी निर्यात पर मंडरा रहा संकट फिलहाल टल गया है।
आज से प्रभावी होना था कड़ा कानून
अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ़ २०२६’ के तहत यह प्रावधान था कि रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले शीर्ष ५ देशों से अमेरिका आने वाले सभी सामानों पर १०० फीसदी तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। यह कड़ा नियम कानून बनने के ठीक ३० दिन बाद, यानी १८ अक्टूबर (रविवार) से लागू होने वाला था। लेकिन समय-सीमा खत्म होने से ठीक दो दिन पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) जारी कर इस पर रोक लगा दी। ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस को सूचित किया कि वैश्विक बाजार की मौजूदा स्थितियों को देखते हुए इन प्रतिबंधों से छूट देना “अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हित” में है।
अमेरिकी यू-टर्न के पीछे घरेलू तेल संकट और पुतिन से डील
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप के इस अचानक बदले रुख के पीछे अमेरिका में बढ़ती महंगाई और ईंधन की आसमान छूती कीमतें हैं, जो ११० डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी थीं। यदि भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों पर यह प्रतिबंध लागू होता, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की भारी किल्लत हो जाती और कीमतें बेकाबू हो जातीं। इसके अलावा, ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक त्वरित समझौते की घोषणा की है, जिसके तहत रूस अमेरिकी बाजार में कीमतों को स्थिर करने के लिए तत्काल ३ लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा।
भारतीय निर्यातकों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए संजीवनी
अमेरिका वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। यदि १००% टैरिफ का यह नियम लागू हो जाता, तो भारत से अमेरिका जाने वाले प्रमुख उत्पाद जैसे- रेडीमेड कपड़े, रत्न-आभूषण, दवाइयां और इंजीनियरिंग सामान बेहद महंगे हो जाते और भारतीय निर्यात पूरी तरह ठप हो सकता था।
वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस छूट से भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत बनी रहेगी। भारत अपनी जरूरत का ८०% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है और रूस इस समय भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है। अब भारतीय रिफाइनरियां बिना किसी अमेरिकी पाबंदी या जुर्माने के डर के रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदना जारी रख सकेंगी।
राहत के बीच ‘कैच’: सतर्क रहने की जरूरत
आर्थिक थिंक-टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, भारतीय नीति निर्माताओं को इस राहत के बीच सतर्क रहने की आवश्यकता है। यह छूट पूर्ण रूप से स्थायी नहीं है, बल्कि इसे केवल ‘होल्ड’ पर डाला गया है। वाशिंगटन भविष्य में द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं और प्रस्तावित ‘भारत-अमेरिका ट्रेड डील’ में इस छूट को एक रणनीतिक हथियार (Leverage) के रूप में इस्तेमाल कर सकता है। फिलहाल, इस फैसले ने भारतीय बाजारों और निर्यातकों को एक बड़ी फौरी राहत जरूर दे दी है।