मध्य प्रदेश के लाखों स्कूली बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए एक बेहद शानदार और बड़ी खुशखबरी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए निःशुल्क यूनिफॉर्म (गणवेश) योजना में एक ऐतिहासिक और बड़ा प्रशासनिक सुधार किया है।
इस योजना और इससे होने वाले फायदों की पूरी विस्तृत रिपोर्ट नीचे दी गई है:
क्या है सरकार का यह बड़ा फैसला?
मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग शैक्षणिक सत्र 2026-27 के तहत राज्य के करीब 56 लाख सरकारी स्कूली छात्रों को बड़ी सौगात देने जा रहा है। अब बच्चों को स्कूल से रेडीमेड ड्रेस नहीं दी जाएगी, बल्कि यूनिफॉर्म सिलवाने के लिए ₹600 की राशि सीधे छात्र या उनके अभिभावकों के बैंक खातों में (Direct Benefit Transfer – DBT के जरिए) ट्रांसफर की जाएगी।
यह राशि कक्षा 1 से लेकर कक्षा 8 तक के सभी पात्र छात्र-छात्राओं को प्रदान की जाएगी ताकि वे अपनी पसंद और सही नाप के अनुसार स्कूल ड्रेस तैयार करवा सकें।
इस नए फैसले से क्या-क्या बड़े फायदे होंगे?
- घटिया क्वालिटी और गलत साइज से मुक्ति: पहले शिकायतें आती थीं कि स्व-सहायता समूहों (SHGs) द्वारा दी जाने वाली ड्रेस की क्वालिटी खराब होती है या बच्चों को छोटे-बड़े साइज मिल जाते हैं। अब माता-पिता खुद अपनी देखरेख में अच्छा कपड़ा खरीदकर सही नाप की ड्रेस सिलवा सकेंगे।
- भ्रष्टाचार और लेटलतीफी पर लगाम: पहले यूनिफॉर्म वितरण में महीनों की देरी होती थी और कई बार आधा सत्र बीत जाने के बाद बच्चों को ड्रेस मिलती थी। अब सीधे खाते में पैसा आने से बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और समय पर बच्चों के पास नई ड्रेस होगी।
- पारदर्शिता (Transparency): डीबीटी व्यवस्था लागू होने से फर्जीवाड़ा पूरी तरह रुक जाएगा। केवल उन्हीं बच्चों को लाभ मिलेगा जिनका बैंक खाता आधार से लिंक है और जो नियमित रूप से स्कूल आ रहे हैं।
पैसे ट्रांसफर करने की क्या है प्रक्रिया?
- खाता अपडेट और ई-केवाईसी: स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी प्राचार्यों और शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे छात्रों के बैंक खातों की जानकारी (समग्र आईडी और आधार लिंकिंग) को जल्द से जल्द अपडेट करें।
- दो जोड़ी यूनिफॉर्म: इस ₹600 की राशि से अभिभावकों को अपने बच्चों के लिए दो जोड़ी अनिवार्य यूनिफॉर्म तैयार करवानी होगी, जो स्कूल द्वारा तय किए गए रंग और पैटर्न के अनुसार होगी।
- लागत सीमा में राहत: ग्रामीण क्षेत्रों में इस राशि से कपड़ा खरीदकर दर्जी से सिलवाने में आसानी होगी, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
सरकार का यह कदम न केवल शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बना रहा है, बल्कि सरकारी स्कूल के बच्चों को एक सम्मानजनक और बेहतर स्कूल लाइफ देने की दिशा में भी बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।