भोपाल/इंदौर/जबलपुर: मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को मुफ्त इलाज देने वाली सबसे बड़ी सरकारी योजना पर कड़ा चाबुक चलाया है। नियमों और तय गुणवत्ता मानकों में लापरवाही बरतने के आरोप में प्रदेश के 65 निजी अस्पतालों को आयुष्मान योजना से असंबद्ध (सूची से बाहर) कर दिया गया है। इस आदेश के बाद अब इन चिन्हित अस्पतालों में मरीजों को आयुष्मान कार्ड दिखाकर मुफ्त इलाज की सुविधा पूरी तरह बंद हो गई है।
🔍 दो श्रेणियों में बांटकर हुई कार्रवाई: क्यों गिली गाज?
दैनिक भास्कर की जांच के अनुसार, सरकार ने अस्पतालों की लापरवाही को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित कर यह कार्रवाई की है:
- NABH मानकों की अनदेखी (60 अस्पताल): सरकार ने 1 अक्टूबर से नियम कड़ा किया था कि सभी बड़े निजी अस्पतालों के पास NABH (National Accreditation Board for Hospitals) का न्यूनतम एंट्री-लेवल सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है। जिन 60 अस्पतालों ने यह प्रमाण पत्र समय पर जमा नहीं किया या जिनकी वैधता खत्म हो चुकी थी, उन्हें तत्काल प्रभाव से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
- छह महीने से ‘निष्क्रिय’ रहना (5 अस्पताल): प्रदेश के 5 अस्पतालों को इसलिए बाहर किया गया क्योंकि वे आयुष्मान से जुड़े तो थे, लेकिन पिछले 6 महीनों से उन्होंने इस योजना के तहत एक भी गरीब मरीज को भर्ती नहीं किया या उन्हें इलाज का लाभ नहीं दिया।
🌆 शहरवार विश्लेषण: किस महानगर में कितने अस्पताल हुए बाहर?
इस बड़ी कार्रवाई की सबसे ज्यादा मार इंदौर और जबलपुर के स्वास्थ्य ढांचे पर पड़ी है, जहां हर रोज हजारों मरीज इलाज के लिए आश्रित रहते हैं:
- इंदौर (17 से 20 अस्पताल): अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, इंदौर में पहले 91 अस्पताल इस योजना का लाभ दे रहे थे, जिसमें से करीब 17-20 अस्पतालों को हटा दिया गया है। अब शहर में केवल 74 अस्पताल ही आयुष्मान सूची में शेष हैं।
- जबलपुर (07 अस्पताल): संस्कारधानी जबलपुर के 7 बड़े और नामी अस्पताल इस कड़े फैसले की जद में आए हैं।
- भोपाल और ग्वालियर: इन दोनों संभागों के भी कई सुपर-स्पेशियलिटी सेंटर्स को गुणवत्ता मानक पूरा न करने की वजह से ब्लैकलिस्ट/डी-इम्पैनल किया गया है।
🏥 इंदौर के कौन-से प्रमुख नामी अस्पताल हुए बाहर?
नइडुनिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बाहर होने वाले अस्पतालों में शहर के कई बहुत ही लोकप्रिय और पुराने नाम शामिल हैं, जहां अब मुफ्त इलाज पूरी तरह सस्पेंड रहेगा:
- चोइथराम नेत्रालय, गीता भवन अस्पताल, सेवाकुंज अस्पताल
- मोहक हाईटेक स्पेशियलिटी, वर्मा यूनियन हॉस्पिटल प्रा. लि., खंडेलवाल अस्पताल
- लक्ष्मी मेमोरियल, दृश्य अस्पताल, मेकरेटिना, गुरुजी सेवा न्यास, पीएटी अस्पताल, एमएस एनर्जी, बांठिया अस्पताल, एमएम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, मेडिस्टा, आर्थोस क्लिनिक और मेवाड़ा अस्पताल।
📉 आम जनता और मरीजों पर क्या होगा असर?
सामाजिक और जमीनी स्तर पर इस फैसले का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया (जैसे इंस्टाग्राम/X) पर लोगों का कहना है कि इंदौर जैसे शहरों में रोजाना औसतन 500 से अधिक मरीज आयुष्मान योजना के जरिए कार्ड पर गंभीर बीमारियों का इलाज लेते हैं। अचानक इतने अस्पतालों के बाहर होने से सरकारी अस्पतालों (जैसे MY हॉस्पिटल) पर मरीजों का दबाव अत्यधिक बढ़ जाएगा।
💡 विशेष नोट और प्रशासनिक सलाह
स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जो अस्पताल 31 अक्टूबर तक अपना वैध NABH सर्टिफिकेट सबमिट कर देंगे, उनकी पात्रता की दोबारा समीक्षा कर उन्हें वापस पैनल में शामिल करने पर विचार किया जा सकता है।
यात्रियों/मरीजों के लिए जरूरी चेतावनी:दैनिक जागरण अखबार की ओर से नागरिकों को सलाह दी गई है कि किसी भी निजी अस्पताल में मरीज को भर्ती करने से पहले आयुष्मान मित्र काउंटर पर जाकर यह अवश्य जांच लें कि उस अस्पताल की आयुष्मान संबद्धता (Empanelment) वर्तमान में चालू है या नहीं, ताकि ऐन वक्त पर आपको भारी-भरकम बिल का भुगतान न करना पड़े।