मध्य प्रदेश के इंदौर और देवास से भ्रष्टाचार का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इंदौर पुलिस विभाग में तैनात एक मामूली प्रधान आरक्षक (ड्राइवर) फिरोज खान के ठिकानों पर की गई जांच में करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति का भंडाफोड़ हुआ है। एक अदने से पुलिस ड्राइवर के पास इतनी अकूत संपत्ति देखकर खुद जांच अधिकारी और पुलिस महकमा दंग रह गया है।
कैसे हुआ इस ‘धनकुबेर’ का पर्दाफाश?
मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस विभाग में बतौर ड्राइवर तैनात फिरोज खान के खिलाफ लगातार आय से अधिक संपत्ति और संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद देवास और इंदौर पुलिस की संयुक्त जांच टीमों ने सुराग जुटाकर कार्रवाई शुरू की। जब उसके वित्तीय दस्तावेजों को खंगाला गया, तो परतों के पीछे काले धन का एक बहुत बड़ा साम्राज्य निकलकर सामने आया।
मिली संपत्ति का पूरा ब्यौरा (शुरुआती आंकड़े)
जांच के पहले ही चरण में आरोपी ड्राइवर की जो संपत्ति उजागर हुई है, वह किसी बड़े उद्योगपति को भी हैरान कर सकती है:
- 21 एक्टिव बैंक खाते: फिरोज खान और उसके परिवार के सदस्यों के नाम पर अलग-अलग बैंकों में 21 खाते सक्रिय मिले हैं, जिनमें लाखों के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है।
- 33 आलीशान मकान और प्लॉट: इंदौर, देवास और आसपास के प्राइम लोकेशंस पर 33 अचल संपत्तियों (मकान, दुकानें और प्लॉट) के दस्तावेज बरामद हुए हैं। इनमें से कई संपत्तियां बेनामी नाम पर खरीदी गई हैं।
- लग्जरी गाड़ियों का काफिला: ड्राइवर के ठिकानों से कई महंगी और लग्जरी कारें व दोपहिया वाहन जब्त किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल वह और उसका परिवार करता था।
- सोने-चांदी के जेवरात और नकदी: घरों की तलाशी में भारी मात्रा में कीमती आभूषण और नकद रुपये भी हाथ लगे हैं, जिनका मूल्यांकन जारी है।
विभाग में हड़कंप, बेनामी नेटवर्क की जांच तेज
एक पुलिस आरक्षक का वेतन फिक्स और सीमित होता है, ऐसे में करोड़ों की यह संपत्ति केवल नौकरी की कमाई से बनाना नामुमकिन है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक:
- रिश्वत और अवैध वसूली का शक: जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगा रही हैं कि क्या फिरोज खान पुलिस विभाग के किसी बड़े सिंडिकेट, अवैध वसूली, या भू-माफियाओं (Land Mafia) से जुड़ा हुआ था।
- जब्ती और सस्पेंशन की कार्रवाई: आरोपी ड्राइवर के खिलाफ विभागीय स्तर पर सख्त एक्शन लेते हुए उसे सस्पेंड करने और उसकी सभी संपत्तियों को कुर्क (Seize) करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
- करीबियों पर भी नजर: पुलिस इस बात की भी गहनता से जांच कर रही है कि उसके 21 बैंक खातों में पैसे कहां से ट्रांसफर किए जा रहे थे और इस काली कमाई को छुपाने में उसके किन-किन करीबियों ने मदद की।
इस कार्रवाई के बाद मध्य प्रदेश पुलिस महकमे के भीतर ऐसे अन्य ‘सफेदपोश’ और संदिग्ध कर्मचारियों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है।