नई दिल्ली / वाशिंगटन: अमेरिका में रहने और वहाँ स्थायी रूप से बसने का सपना देख रहे भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और टेक दिग्गजों को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी श्रम विभाग (DOL) ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए भारत की अग्रणी आईटी कंपनियों सहित दुनिया के 8 बड़े तकनीकी दिग्गजों को ‘ग्रीन कार्ड प्रोग्राम’ (PERM) से तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है。
अमेरिकी सरकार की इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद से वैश्विक टेक उद्योग और विशेषकर भारतीय आउटसोर्सिंग कंपनियों के बीच हड़कंप मच गया है。

इन 8 दिग्गज कंपनियों पर गिरी गाज
अमेरिकी प्रशासन के निशाने पर इस बार न केवल भारतीय बल्कि कुछ शीर्ष अमेरिकी और वैश्विक कंपनियां भी आई हैं। जिन कंपनियों को इस लिस्ट से बाहर किया गया है, उनमें शामिल हैं:
- भारतीय आईटी कंपनियां: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस (Infosys), विप्रो (Wipro), और एचसीएल टेक्नोलॉजीज (HCLTech)।
- वैश्विक और अमेरिकी टेक कंपनियां: माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), एडोबी (Adobe), कॉग्निजेंट (Cognizant), और कैपजेमिनी (Capgemini)।
क्यों लिया गया यह सख्त फैसला?
अमेरिकी श्रम विभाग (DOL) के अनुसार, यह कदम विदेशी कार्यबल के वीजा कार्यक्रमों और रोजगार प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को देखते हुए उठाया गया है।
- स्थानीय अमेरिकी नौकरियों का संरक्षण: ट्रंप प्रशासन का दावा है कि ये कंपनियां ग्रीन कार्ड और H-1B प्रोग्राम का कथित तौर पर इस तरह इस्तेमाल कर रही थीं, जिससे स्थानीय अमेरिकी नागरिकों को नौकरियों के अवसरों से वंचित होना पड़ रहा था。
- वेतन में कटौती के आरोप (Wage Undercutting): कंपनियों पर आरोप हैं कि वे विदेशी कामगारों को अमेरिकी बाजार के मानक से कम वेतन देकर प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर रही थीं。
- सक्रिय जांच: माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी जैसी बड़ी कंपनियों को उनके खिलाफ चल रही कुछ सक्रिय संघीय जांचों (Active Federal Investigations) के चलते इस सूची में डाला गया है。
क्या है PERM प्रोग्राम और निलंबन का क्या होगा असर?
PERM (Permanent Labor Certification) वह बुनियादी चरण है, जिसके जरिए कोई भी अमेरिकी नियोक्ता अपने विदेशी कर्मचारी (जैसे H-1B वीजा धारक) के लिए स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन की शुरुआत करता है。
इस निलंबन का सीधा मतलब यह है कि:
- अब ये 8 कंपनियां अमेरिकी सरकार के पास कोई भी नया PERM आवेदन जमा नहीं कर पाएंगी。
- जो आवेदन पहले से प्रक्रिया में हैं (Pending), उन्हें भी फिलहाल फ्रीज (रोक) कर दिया गया है。
- H-1B धारकों को राहत: हालांकि, राहत की बात यह है कि कर्मचारियों के मौजूदा H-1B वीजा पर कोई आंच नहीं आएगी और वे अमेरिका में रहकर काम कर सकते हैं, लेकिन उनका ग्रीन कार्ड मिलने का रास्ता बेहद लंबा और अनिश्चित हो जाएगा。
कंपनियों का क्या है रुख? क्या डूबा शेयर बाजार?
इस बड़े नीतिगत झटके के बाद भी भारतीय कंपनियों का दावा है कि उनके तात्कालिक कामकाज या वित्तीय नतीजों पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा。
देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी TCS ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि पिछले दो वर्षों में उनके द्वारा किए गए PERM आवेदनों की संख्या दहाई के आंकड़े (Single Digit) से भी कम थी। इसलिए, इस फैसले से उनकी प्रतिभा रणनीति या ग्राहकों के काम में कोई बाधा नहीं आएगी। कंपनियां अब तेजी से अमेरिकी नागरिकों की स्थानीय भर्ती पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं。
दिलचस्प बात यह रही कि इस खबर के बावजूद, शानदार तिमाही नतीजों के भरोसे आज भारतीय शेयर बाजार में निफ्टी आईटी इंडेक्स (Nifty IT) करीब 3.5% की बढ़त के साथ बंद हुआ, जिसका नेतृत्व खुद टीसीएस के शेयरों ने किया。