हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का पार्थिव शरीर गुरुवार (8 अक्टूबर 2026) देर रात पुणे के पास उनके डोंजे गांव स्थित फार्म हाउस पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हो गया। 75 वर्ष की उम्र में गोवा में कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) पड़ने के कारण उनका निधन हो गया था।
पिता को अंतिम विदाई देते हुए उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने मुखाग्नि दी, जहाँ उनकी पत्नी नीलकांति पाटेकर भी नम आँखों से मौजूद रहीं। इस दुःखद विदाई की पूरी मुख्य रिपोर्ट इस प्रकार है:
🎖️ पूरे राजकीय सम्मान (State Honours) के साथ विदाई
नाना पाटेकर को विदाई देने के लिए महाराष्ट्र सरकार की ओर से राजकीय सम्मान का ऐलान किया गया था। अंतिम संस्कार से पहले पुलिस बल की टुकड़ी ने उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ (शासकीय मानवंदना) दिया। तिरंगे में लिपटे उनके पार्थिव शरीर को देखकर वहां मौजूद हजारों प्रशंसकों और ग्रामीणों की आँखें भर आईं।
🏛️ मुख्यमंत्री और राजनीतिक दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि
नाना पाटेकर का पार्थिव शरीर जब विशेष एम्बुलेंस से गोवा से पुणे एयरपोर्ट पहुँचा, तो वहाँ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस स्वयं श्रद्धांजलि देने पहुँचे। सीएम फडणवीस ने नाना के ताबूत (कॉफिन) को कंधा भी दिया, परिवार को सांत्वना दी और उनके बेटे मल्हार को गले लगाया।
इसके साथ ही, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे, सुनेत्रा पवार, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले और केंद्रीय राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल समेत राज्य सरकार के कई मंत्रियों ने डोंजे गांव पहुंचकर दिवंगत अभिनेता को नमन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया के जरिए नाना पाटेकर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।
🎬 बॉलीवुड और मराठी सिनेमा जगत में शोक
अंतिम संस्कार के दौरान फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े चेहरे और नाना के करीबी दोस्त मौजूद रहे:
- अभिनेता जैकी श्रॉफ और मकरंद अनासपुरे अपने अजीज दोस्त को अंतिम विदाई देने पहुंचे। मकरंद अंतिम संस्कार के दौरान बेहद बिलखते हुए नजर आए।
- सुपरस्टार शाहरुख खान ने अपनी डेब्यू फिल्म राजू बन गया जेंटलमैन (1992) के दिनों को याद करते हुए एक लंबा और बेहद भावुक नोट लिखा।
- अभिनेता अनिल कपूर ने भी अपनी फिल्म वेलकम के मशहूर ‘उदय-मजनू’ भाईचारे को याद करते हुए लिखा— “मेरा दोस्त मुझे छोड़कर चला गया… पहले सतीश और अब मेरा नान्या। तू अचानक बहुत जल्दी चला गया।”
🌌 रात 11:30 बजे क्यों हुआ अंतिम संस्कार?
सनातन परंपरा के अनुसार अमूमन सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार नहीं किया जाता, लेकिन नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार रात करीब 11:30 बजे किया गया। इस पर उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने स्पष्ट किया कि, “चूंकि निधन सुबह गोवा में हुआ था, वहां से पार्थिव शरीर को पुणे के पैतृक गांव फार्महाउस लाने में कुछ कानूनी और परिवहन संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने में उम्मीद से अधिक समय लग गया। शव को और अधिक समय तक रखना ठीक नहीं था, इसलिए परिवार ने रात में ही अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया।”
🚜 किसानों और सामाजिक कार्यों की छूटी छत्रछाया
नाना पाटेकर सिर्फ परदे के महानायक नहीं थे, बल्कि असल जिंदगी में वे महाराष्ट्र के सूखे से प्रभावित क्षेत्रों और किसानों के मसीहा थे। उनके द्वारा स्थापित ‘नाम फाउंडेशन’ (Naam Foundation) के जरिए उन्होंने हजारों जरूरतमंद किसानों की मदद की थी। उनकी विदाई पर ग्रामीणों ने कहा कि आज हमारे ऊपर से एक बड़ी “छत्रछाया” उठ गई है।