नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) के कई सांसदों और समर्थकों के खिलाफ संसद मार्ग (पार्लियामेंट स्ट्रीट) थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। कांग्रेस नेताओं पर नई दिल्ली स्थित सरकारी इमारत ‘आकाशवाणी भवन’ के परिसर में बिना अनुमति के जबरन घुसने (Criminal Trespassing) और वहां अनधिकृत रूप से धरना देने का गंभीर आरोप है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा घटनाक्रम मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को शुरू हुआ। ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसदों ने चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों (‘वोट चोरी’) का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद भवन से चुनाव आयोग के दफ्तर तक एक विरोध मार्च निकाला था
।पुलिस के अनुसार, इस मार्च के लिए नई दिल्ली जिला पुलिस उपायुक्त (DCP) कार्यालय से कोई पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी और इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पूर्व में धारा 144) के तहत प्रतिबंध लागू थे। सुरक्षा बलों ने चुनाव आयोग के दफ्तर से करीब 300-400 मीटर पहले, नीति आयोग कार्यालय के पास भारी बैरिकेडिंग करके विपक्षी नेताओं के मार्च को रोक दिया।
आकाशवाणी परिसर में ‘जबरन’ प्रवेश और 8 घंटे का धरना
आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च रुकने के बाद राहुल गांधी बैरिकेड्स पर चढ़ गए और विपक्ष के अन्य नेताओं के साथ नारेबाजी शुरू कर दी। इसी बीच दोपहर के समय राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, सुप्रिया सुले और अन्य सांसद पास में ही स्थित आकाशवाणी भवन के गेट नंबर 4 से परिसर के अंदर दाखिल हो गए।
आकाशवाणी प्रशासन की शिकायत पर कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने बताया कि यह प्राथमिकी आकाशवाणी भवन के कर्मचारियों और प्रशासन की तरफ से मिली आधिकारिक लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। शिकायत में सरकारी संपत्ति में बिना इजाजत घुसने और कार्य में व्यवधान डालने की बात कही गई थी।
इसके साथ ही, एबीपी न्यूज़ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार और गुरुवार को हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ कथित धक्का-मुक्की, बदसलूकी और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में भी नेताओं पर अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
राजनीतिक घमासान: कांग्रेस और राहुल गांधी का पलटवार
एफआईआर दर्ज होने के बाद कांग्रेस पार्टी ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने बयान जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की जोड़ी विपक्ष की आवाज से घबराकर हताश हो चुकी है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं, वे सांसदों के साथ थे, वे कहीं भी जबरन नहीं घुसे। ये सरकारी संस्थाएं देश की हैं, किसी राजनीतिक दल की बपौती नहीं हैं।”
वहीं, इस मामले पर जब खुद राहुल गांधी से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बेबाकी से जवाब देते हुए कहा:
“मेरे खिलाफ पहले से ही करीब 45 एफआईआर दर्ज हैं। मेरा लक्ष्य इसे 100 तक पहुंचाने का है। ये एफआईआर मेरे लिए किसी मेडल (पदक) की तरह हैं।”
आगे क्या होगी कानूनी कार्रवाई?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, दर्ज मामलों के तहत फिलहाल किसी दंडात्मक या बलपूर्वक गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई की उम्मीद कम है। हालांकि, आने वाले दिनों में दिल्ली पुलिस नामजद आरोपियों (राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य) को आधिकारिक नोटिस भेजकर उनके बयान दर्ज करने के लिए जांच में शामिल होने को कह सकती है।