नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026 — रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने पुरुषीकृत किया कि भारत ने अपनी स्वदेशी आकाश सतह-से-हवा मिसाइल प्रणाली को तीन देशों को निर्यात किया है — आर्मेनिया, तजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान। यह घोषणा भारतीय रक्षा निर्यात के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
क्षा सचिव का बयान
ANI से बातचीत में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा:
“पहला ग्राहक आर्मेनिया था, जिसने कई बैटरी लीं। उसके बाद हमने इसे तजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को भी निर्यात किया। उत्पादन स्थिर हो गया है। हमारे अपने सेनानों के लिए भी अतिरिक्त आदेश हैं, और मुझे विश्वास है कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों से भी कई और आदेश आएंगे।”
सिंह ने आकाश को भारत के रक्षा निर्यात की सफल कहानियों में से एक बताया और मिसाइल प्रणाली के उच्च-वेग वाले वायु लक्ष्यों से निपटने की क्षमता पर बल दिया।
तीन देशों की भूमिका
| देश | स्थिति | विवरण |
| आर्मेनिया | पहला विदेशी ग्राहक | कई बैटरी प्राप्त कीं (MK-1S संस्करण) |
| तजिकिस्तान | दूसरा ग्राहक | केंद्रीय एशिया में प्रवेश |
| तुर्कमेनिस्तान | तीसरा ग्राहक | चीनी प्रणालियों के साथ भारतीय सिस्टम जुड़ा |
पूर्व DRDO अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने सितंबर 2026 की मध्य में ही इन निर्यातों की पुष्टि की थी। 1 अक्टूबर को रक्षा सचिव द्वारा आधिकारिक पुष्टि से इस घोषणा को रक्षा मंत्रालय स्तर पर उठाया गया।
आकाश सिस्टम की विशेषताएं
| विशेषता | विवरण |
| प्रकार | सतह-से-हवा मिसाइल (SAM), लघु-मध्यम दूरी |
| विकास | DRDO (रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन) |
| उत्पादन | भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) + भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) |
| प्रोपल्शन | रैमजेट |
| गुइडेंस | कमांड गाइडेंस |
| क्षमता | एक साथ कई लक्ष्यों पर हमला |
| आकाश प्रीम | 4,500 मीटर से ऊपर की ऊंचाई पर संचालन, स्वदेशी रेडियो-फ्रीक्वेंसी सीकर |
| लड़ाकू प्रमाणन | मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के विरुद्ध सफल प्रदर्शन |
तुर्कमेनिस्तान: चीनी प्रणालियों के साथ भारतीय मिसाइल
तुर्कमेनिस्तान पहले से ही चीनी निर्मित हवा रक्षा प्रणालियां चला रहा है:
- FK-2000 (लघु-दूरी)
- FD-2000
- KS-1A
- FM-90
आकाश का निर्यात इसका मतलब यह नहीं कि चीनी प्रणालियों की जगह भारत की आ रही है — बल्कि तुर्कमेनिस्तान अपने हवा रक्षा नएतवर्क में विविध स्रोतों से उपकरण जोड़ रहा है।
रणनीतिक महत्व
- केंद्रीय एशिया में भारत का पहला पुरुषीकृत हवा रक्षा निर्यात
- इस क्षेत्र में परंपरागत रूप से रूसी/सोवियत हथियारों का प्रभुत्व था
- युक्रेन संघर्ष के कारण रूसी हथियारों की उपलब्धता प्रभावित हुई है
- केंद्रीय एशियाई देश हथियार आपूर्ति विविधीकरण की ओर बढ़ रहे हैं
- SCMP के अनुसार, नई दिल्ली केंद्रीय एशियाई देशों को सस्ती और भरोसेमंद विकल्प प्रदान कर रही है
- भारत के रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ (2025-26) की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे हैं
- रक्षा मंत्रालय का लक्ष्य: अगले दो वर्षों में ₹50,000 करोड़ निर्यात
विशेषज्ञों की राय
“आकाश प्रणाली का निर्यात भविष्य में और विस्तृत होगा क्योंकि यह एक शुद्ध रक्षात्मक प्रणाली है। यह निर्यात भारत के विश्वस्तुत वैश्विक रक्षा निर्यातक के रूप में उभरने का प्रमाण है।”
— रमेश वानखेडे, रक्षा विशेषज्ञ
“भारत के मिसाइल सौदे केंद्रीय एशिया में रूस और चीन के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यह क्षेत्र अब हथियार आपूर्ति में विविधीकरण की ओर बढ़ रहा है।”
— SCMP विश्लेषण
भविष्य की दिशा
- उत्पादन स्थिर हो चुका है
- भारतीय सेना के लिए अतिरिक्त आदेश प्राप्त
- रडार सहायता, मिसाइल पुनर्भरण, रखरखाव और प्रशिक्षण के लंबे समय के औद्योगिक संबंधों की संभावना
- अन्य देशों से आदेशों की संभावना