इस्लामाबाद / पेशावर: पड़ोसी देश पाकिस्तान एक बार फिर बेहद गंभीर और ऐतिहासिक राजनीतिक संकट के मुहाने पर आकर खड़ा हो गया है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल से रिहाई की मांग को लेकर हो रहे देशव्यापी उग्र प्रदर्शनों के बीच शहबाज शरीफ सरकार खैबर पख्तूनख्वा (KP) प्रांत में आपातकाल (Emergency) लागू करने की तैयारी में है।
खबरों के मुताबिक, संघीय सरकार इस अशांत प्रांत की चुनी हुई सरकार को बर्खास्त कर वहां राज्यपाल शासन (Governor’s Rule) लगाने के लिए आज संसद का एक विशेष और आपातकालीन संयुक्त सत्र बुला रही है। इस कदम के बाद पाकिस्तान की राजनीति में सेना और सरकार बनाम इमरान खान समर्थकों के बीच आर-पार की जंग शुरू हो गई है।
क्यों लिया जा रहा है आपातकाल (Emergency) लगाने का फैसला?
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान पिछले कई महीनों से जेल में बंद हैं। हाल के दिनों में उनकी पार्टी और समर्थकों ने इस्लामाबाद और रावलपिंडी समेत पूरे देश में हिंसक आंदोलन छेड़ रखा है।
- खैबर पख्तूनख्वा बना आंदोलन का केंद्र: खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इमरान खान की पार्टी (PTI) की सरकार है। संघीय सरकार का आरोप है कि इस प्रांत के मुख्यमंत्री और वहां की पुलिस व सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल देश की राजधानी इस्लामाबाद पर धाबा बोलने और सुरक्षा बलों के खिलाफ हिंसा भड़काने के लिए किया जा रहा है।
- सुरक्षा बलों पर हमले: पिछले कुछ दिनों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान भारी हिंसा हुई है, जिसमें कई पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों (Rangers) की जान गई है। इसके बाद पाकिस्तानी सेना और शहबाज सरकार ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।
आज संसद के विशेष सत्र में क्या होगा?
पाकिस्तानी संविधान के नियमों के अनुसार, किसी भी राज्य की सरकार को बर्खास्त करने और आपातकाल लगाने के लिए संसद की मंजूरी आवश्यक होती है।
- प्रांतीय सरकार की बर्खास्तगी: आज बुलाए गए संसद के विशेष सत्र में खैबर पख्तूनख्वा की पीटीआई सरकार को बर्खास्त करने का प्रस्ताव पेश किया जा सकता है।
- आर्टिकल 234 का इस्तेमाल: शहबाज शरीफ सरकार पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 234 (Article 234) के तहत प्रांत की कमान पूरी तरह से राज्यपाल के हाथों में सौंपने का अध्यादेश ला सकती है, जिससे वहां कानून व्यवस्था को सीधे सेना और संघीय पुलिस के नियंत्रण में लिया जा सके।
- नेताओं की धरपकड़: इस्लामाबाद और पेशावर को जोड़ने वाले हाईवे को पूरी तरह सील कर दिया गया है और पीटीआई के कई शीर्ष नेताओं को नजरबंद या गिरफ्तार करने के आदेश जारी किए जा चुके हैं।
क्या पाकिस्तान में लग सकता है ‘मार्शल लॉ’?
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लगाने के बाद भी हालात काबू में नहीं आते हैं, तो पाकिस्तानी सेना पूरे देश की कमान अपने हाथ में ले सकती है, जिससे देश में एक बार फिर ‘मार्शल लॉ’ (सैन्य शासन) लागू होने का खतरा मंडराने लगा है। देश की चरमराती अर्थव्यवस्था और बढ़ते विदेशी कर्ज के बीच इस राजनीतिक अस्थिरता ने पाकिस्तान को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया है।
संयुक्त राष्ट्र और कई वैश्विक संगठन पाकिस्तान के इन हालातों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और उन्होंने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
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