भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल ने चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के पहले चरण में स्थापित देश के छह प्रमुख एम्स संस्थानों में से एम्स भोपाल पूर्ण NABH (राष्ट्रीय अस्पताल एवं स्वास्थ्य सेवा प्रदाता प्रत्यायन बोर्ड) मान्यता प्राप्त करने वाला पहला संस्थान बन गया है।
यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रमाणपत्र मिलने की पुष्टि केंद्रीय सरकार की आधिकारिक रिपोर्टों में हुई है, जिसके अनुसार यह मान्यता 23 सितंबर 2030 तक वैध रहेगी।
🏥 सभी 1,457 बेड और सुपर स्पेशलिटी सेवाएं कवर
आमतौर पर बड़े अस्पतालों को कुछ विशिष्ट विभागों के लिए ही यह ग्रेड मिलता है, लेकिन एम्स भोपाल को इसके सभी 1,457 बिस्तरों, सभी विशेषज्ञताओं और समस्त सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा सेवाओं के लिए एक साथ यह ‘फुल एक्रेडिटेशन’ प्रदान किया गया है।
🛡️ कड़े निरीक्षण के बाद मिली सफलता
इस उपलब्धि को हासिल करने का सफर लंबा और बेहद कड़ा रहा है:
- जुलाई 2025 में हुआ था पंजीकरण: इस मान्यता के लिए प्रक्रिया जुलाई 2025 में आवेदन के साथ शुरू हुई थी।
- वरिष्ठ अधिकारियों का भौतिक मूल्यांकन: राष्ट्रीय स्तर की 5 वरिष्ठ मूल्यांकनकर्ताओं (Assessors) की टीम ने अस्पताल परिसर का बारीकी से भौतिक निरीक्षण किया था। [1]
- इन मानकों की हुई जांच: टीम ने बुनियादी ढांचे (Infrastructure), क्लीनिकल प्रोटोकॉल, संक्रमण नियंत्रण (Infection Control), प्रशासनिक व्यवस्था, दवा प्रबंधन और मरीज सुरक्षा मानकों का कड़ाई से मूल्यांकन किया, जिसके बाद बोर्ड ने अंतिम प्रमाण पत्र जारी किया।
🤝 मरीजों को सीधे तौर पर क्या होगा फायदा?
इस मान्यता से सबसे बड़ा लाभ आम मरीजों को होगा:
- अंतरराष्ट्रीय स्तर का इलाज: अस्पताल में उपचार की प्रक्रियाएं अब उच्चतम वैश्विक मानकों के अनुरूप संचालित होंगी।
- शून्य संक्रमण नीति: मरीजों को अस्पताल जनित संक्रमणों (Hospital-acquired infections) से बचाने के लिए अत्यधिक सुरक्षित वातावरण मिलेगा।
- कैशलेस और आयुष्मान दावों में आसानी: आयुष्मान भारत और अन्य सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के दावों (Claims) के निपटारे में अधिक पारदर्शिता आएगी, जिससे मरीजों को कैशलेस सेवाओं का लाभ सुगमता से मिलेगा।
यह मध्य प्रदेश के साथ-साथ पूरे मध्य भारत के लिए गर्व का विषय है कि शासकीय क्षेत्र में इतनी बड़ी क्षमता (1,457 बेड) के साथ गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने में भोपाल एम्स देश का सिरमौर बन गया है।