शहडोल: मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से छात्र आंदोलन की एक बड़ी और अभूतपूर्व तस्वीर सामने आई है। जैतपुर के बिरौड़ी स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के करीब 200 छात्र-छात्राएं अपनी मांगों को लेकर आधी रात को हॉस्टल की बाउंड्री वॉल लांघकर सड़क पर उतर आए। बच्चे जिला मुख्यालय (कलेक्टर कार्यालय) जाकर सीधे कलेक्टर से अपनी शिकायत दर्ज कराना चाहते थे। लगभग 15 किलोमीटर पैदल मार्च करने के बाद जब प्रशासन को भनक लगी, तो प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया।
आंदोलन की असली वजह: क्यों फूटा बच्चों का गुस्सा?
छात्रों की इस बगावत के पीछे स्कूल के प्रभारी प्राचार्य (Principal) और हॉस्टल की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर लंबे समय से दबा गुस्सा था:
- प्रभारी प्राचार्य को हटाने की मांग: छात्रों का आरोप है कि स्कूल में नियम विरुद्ध तरीके से एक जूनियर माध्यमिक शिक्षक को प्राचार्य का प्रभार सौंप दिया गया है, जिनकी कार्यप्रणाली से छात्र असंतुष्ट हैं।
- बुनियादी सुविधाओं की बदहाली: हॉस्टल में रह रहे आदिवासी छात्र-छात्राओं का आरोप है कि उन्हें मीनू के अनुसार गुणवत्तापूर्ण खाना नहीं दिया जाता, पीने के साफ पानी की किल्लत है और पढ़ाई के लिए जरूरी स्टेशनरी, किताबें व लाइब्रेरी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी गायब हैं।
रात के अंधेरे में हाईवे पर गूंजे नारे
स्थानीय स्तर पर अपनी शिकायतें अनसुनी होने के बाद, बुधवार की रात छात्रों ने एक बड़ा फैसला लिया। वे किसी स्थानीय अधिकारी से बात करने के बजाय सीधे जिले के मुखिया यानी शहडोल कलेक्टर से मिलने की जिद पर अड़ गए।
रात के सन्नाटे में करीब 200 छात्र हॉस्टल की दीवारें फांदकर मुख्य मार्ग पर आ गए और “हमारी मांगें पूरी करो” व “प्रिंसिपल को हटाओ” के नारे लगाते हुए शहडोल मुख्यालय (दूरी करीब 70 किमी) की ओर पैदल ही आगे बढ़ने लगे।
15 किलोमीटर बाद जागा प्रशासन, भेजी गईं बसें
इतनी बड़ी संख्या में आदिवासी बच्चों के रात में हाईवे पर पैदल मार्च करने की खबर जैसे ही शहडोल कंट्रोल रूम तक पहुंची, अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। जब बच्चे चलते-चलते 15 किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर चुके थे, तब शहडोल से आनन-फानन में एडीएम (ADM), एसडीएम (SDM), तहसीलदार और जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
शुरुआत में बच्चों ने लौटने से साफ मना कर दिया। इसी बीच, लड़कों के समर्थन में हॉस्टल से छात्राएं (Girls) भी बाहर निकल आईं। स्थिति बिगड़ती देख प्रशासनिक अधिकारियों ने बीच सड़क पर ही बच्चों से बातचीत की और उनकी सभी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने व प्राचार्य से जुड़े मामले पर त्वरित निर्णय लेने का लिखित व ठोस आश्वासन दिया।
सुरक्षित वापस भेजे गए छात्र
अधिकारियों की काफी समझाइश और सुरक्षा का हवाला दिए जाने के बाद छात्र शांत हुए। इसके बाद प्रशासन द्वारा मौके पर बुलाई गई दो विशेष बसों के माध्यम से सभी छात्र-छात्राओं को देर रात सुरक्षित वापस उनके हॉस्टल भेजा गया। कलेक्टर ने इस पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष कमेटी गठित कर दी है।