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नई दिल्ली: भारत में चाय की टपरी से लेकर बड़े-बड़े मॉल तक हर जगह इस्तेमाल होने वाले यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। डिजिटल ट्रांजैक्शन के नियमों में बदलाव और मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) की समीक्षा के बाद, यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लगने वाले शुल्क से जुड़े नए नियम जनवरी 2027 से लागू हो सकते हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को और अधिक टिकाऊ बनाने के लिए काफी समय से चल रही समीक्षा के बाद यह संभावित समयसीमा सामने आई है।


क्या है MDR और क्या आम जनता से वसूला जाएगा चार्ज?

इस खबर के सामने आते ही आम उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब उन्हें भी हर यूपीआई पेमेंट पर एक्स्ट्रा पैसे देने होंगे?

इस पूरे मामले को बेहद आसान भाषा में समझिए:

  • आम जनता के लिए पूरी तरह मुफ्त: राहत की बात यह है कि सरकार और नियामक संस्थाओं का मुख्य फोकस पीयर-टू-पीयर (P2P) यानी एक आम आदमी द्वारा दूसरे आम आदमी (जैसे दोस्तों या रिश्तेदारों) को भेजे जाने वाले पैसों पर कोई चार्ज लगाने का नहीं है। यह पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेगा।
  • मर्चेंट्स (व्यापारियों) पर पड़ सकता है असर: यह संभावित शुल्क मुख्य रूप से मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़ा है। इसका मतलब है कि जब आप किसी दुकान, ई-कॉमर्स वेबसाइट या बड़े शोरूम में क्यूआर कोड (QR Code) स्कैन करके पेमेंट करते हैं, तो उस ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करने के बदले बैंक और पेमेंट गेटवे कंपनियां व्यापारियों से एक छोटा सा हिस्सा शुल्क के रूप में वसूल सकती हैं।

क्यों जरूरी माना जा रहा है UPI पर यह नया नियम?

फिनटेक (Fintech) और बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई का इंफ्रास्ट्रक्चर चलाने, सर्वर को सुरक्षित रखने और फ्रॉड रोकने के लिए पेमेंट कंपनियों को भारी खर्च करना पड़ता है।

  1. कंपनियों की कमाई का जरिया: वर्तमान में अधिकांश यूपीआई पेमेंट्स पर शून्य एमडीआर (Zero MDR) होने के कारण PhonePe, Google Pay और Paytm जैसी कंपनियों को बुनियादी ढांचा बनाए रखने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
  2. वॉलेट और PPI पर पहले से है चार्ज: आपको बता दें कि प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) जैसे कि डिजिटल वॉलेट से मर्चेंट क्यूआर कोड पर ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर पहले से ही 1.1% का इंटरचेंज शुल्क लागू है। अब जनवरी 2027 से इन नियमों को और अधिक स्पष्ट और व्यापक रूप से री-स्ट्रक्चर किया जा सकता है।

नए नियमों के लागू होने के बाद क्या बदल जाएगा?

अगर जनवरी 2027 से नए नियम लागू होते हैं, तो:

  • छोटे दुकानदारों को मिल सकती है छूट: ₹2,000 से कम के छोटे किराना या सब्जी भुगतानों को इस दायरे से बाहर रखा जा सकता है ताकि डिजिटल इंडिया की रफ्तार धीमी न हो।
  • बड़े मर्चेंट्स पर लगेगा चार्ज: बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों और कॉर्पोरेट रिटेलर्स को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मामूली एमडीआर शुल्क देना पड़ सकता है।

प्रशासन और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन इस बात का पूरा ध्यान रख रहे हैं कि नियम इस तरह तैयार किए जाएं जिससे आम ग्राहकों पर कोई वित्तीय बोझ न पड़े और देश में डिजिटल पेमेंट्स का क्रेज लगातार बढ़ता रहे।


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By Admin

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