
उज्जैन नगर निगम में ठेकेदारों के भुगतान को लेकर मामला उच्च न्यायालय, इंदौर में सुनवाई के दौरान सामने आया। इस केस में ठेकेदार विमल जैन, जिन्होंने गंधर्व के पुनरुद्धार और सौंदर्यकरण का काम किया था, ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उनकी शिकायत थी कि नगर निगम ने 70 लाख रुपये का कार्य पूरा होने के बावजूद उन्हें भुगतान नहीं किया।
सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार केतु और जस्टिस S.A. धर्माधिकारी की खंडपीठ ने नगर निगम द्वारा फंड की कमी का तर्क देने पर कड़ा रुख अपनाया। चीफ जस्टिस ने निगम के इस तर्क को अस्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि नगर निगम अपने राजपत्रित अधिकारियों का वेतन कम करके ठेकेदारों को भुगतान करे। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि यदि उज्जैन नगर निगम के पास भुगतान के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है, तो राज्य सरकार इसे टेक ओवर कर ले।
कोर्ट ने साफ किया कि एक सप्ताह के भीतर ठेकेदार को भुगतान किया जाए। यदि समय सीमा में भुगतान नहीं हुआ, तो निगम आयुक्त के खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला दर्ज किया जाएगा।




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