,

अमरकंटक तक रेल विस्तार और औद्योगिक विस्तार से खुलेगा विकास का नया गलियारा

अमरकंटक तक रेल विस्तार और औद्योगिक विस्तार से खुलेगा विकास का नया गलियारा


वरिष्ठ पत्रकार कैलाश पाण्डेय की रिपोर्टिंग और ‘कक्का की चौपाल’ में उठे सवालों पर बजट की मुहर
तीर्थ, पर्यटन, शिक्षा और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार, IGNTU अमरकंटक सहित पूरे अंचल को होगा बहुआयामी लाभ

अनूपपुर।
जिले के वरिष्ठ वकील अनूपपुर विकास मंच के सक्रिय पदाधिकारी वासुदेव चटर्जी ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि विकास की दिशा अक्सर सत्ता के गलियारों से नहीं, बल्कि ज़मीन से उठे सवालों से तय होती है। अनूपपुर–शहडोल अंचल में वर्षों से रेल कनेक्टिविटी को लेकर उठती आवाज़, वरिष्ठ पत्रकार कैलाश पाण्डेय की निरंतर न्यूज़ रिपोर्टिंग और उनके स्थायी जनपक्षीय कॉलम ‘कक्का की चौपाल’ में बार-बार रखे गए मुद्दों का ही परिणाम है कि अमरकंटक तक रेल विस्तार का लगभग 17 वर्ष पुराना सपना अब साकार होता दिख रहा है। रेल बजट 2025-26 में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) द्वारा शामिल किए गए नए रेल सर्वे प्रस्ताव इस बात का प्रमाण हैं कि जब मुद्दे ईमानदारी से उठाए जाते हैं, तो सरकारें उन्हें सुनती भी हैं और सार्वजनिक हित में स्वीकार भी करती हैं।
रेल बजट में शामिल प्रस्तावों ने न केवल अमरकंटक बल्कि पूरे अनूपपुर–शहडोल अंचल के विकास को नई दिशा देने की उम्मीद जगा दी है। यह फैसला वर्षों से कक्का की चौपाल, अख़बारों के कॉलम, जनसंवाद और जनप्रतिनिधियों की बैठकों में उठते उस बुनियादी सवाल का जवाब है कि खनिज, जंगल, तीर्थ और श्रम देने वाला यह क्षेत्र क्या हमेशा रेल नक्शे के हाशिये पर ही रहेगा।
धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से विश्वविख्यात नर्मदा उद्गम स्थल अमरकंटक अब तक रेल सुविधा से वंचित रहा है, जिससे देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों और विद्यार्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। रेल बजट दस्तावेज़ में पेंड्रा–अमरकंटक–डिंडोरी–मंडला–घंसौर लगभग 200 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के लिए रिकॉनिसेंस इंजीनियरिंग कम ट्रैफिक सर्वे को स्वीकृति दी गई है, जिसकी अनुमानित लागत 0.50 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके साथ ही जबलपुर–पेंड्रा वाया डिंडोरी (240 किमी) नई रेल लाइन के सर्वे को भी शामिल किया गया है, जिससे महाकोशल, आदिवासी अंचल और उत्तरी छत्तीसगढ़ के बीच सीधा रेल संपर्क स्थापित होने की संभावना बनी है।
शहडोल जिले के लिए जयसिंहनगर–शहडोल (50 किमी) नई रेल लाइन का सर्वे प्रस्ताव उस क्षेत्र के लिए विशेष महत्व रखता है, जहां कोयला, बॉक्साइट पत्थर रेत प्राकृतिक गैस पॉवर प्लांट जंगल और श्रम संसाधन तो हैं, लेकिन परिवहन कनेक्टिविटी वर्षों से सीमित रही है। वहीं अनूपपुर को इस बजट में केवल एक स्टेशन नहीं, बल्कि रणनीतिक जंक्शन के रूप में देखा गया है। अंबिकापुर–गढ़वा (170 किमी) नई रेल लाइन का सर्वे, अनूपपुर फ्लाईओवर पसला बाई पास रोड से हार्री रेलवे फाटक तक और पेंड्रा रोड–शहडोल मल्टी ट्रैकिंग जैसे प्रस्ताव यह संकेत देते हैं कि अनूपपुर भविष्य में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रेल केंद्र बन सकता है।
इसके साथ ही झारसुगुड़ा–चांपा–बिलासपुर सेक्शन में फ्लाईओवर, ग्रेड सेपरेटर और मल्टी ट्रैकिंग को प्राथमिकता देकर मालगाड़ी और औद्योगिक लॉजिस्टिक्स को गति देने की रणनीति भी सामने आई है, जिसका अप्रत्यक्ष लाभ पूरे अनूपपुर–शहडोल अंचल को मिलेगा।

इस पूरी रेल योजना के पीछे वर्षों की निरंतर पहल जुड़ी रही है। 2009 में वरिष्ठ पत्रकार कैलाश पाण्डेय ने अपने लेखों के माध्यम से पेंड्रा से अमरकंटक तक रेल विस्तार का दूरदर्शी विचार सार्वजनिक विमर्श में रखा था। बाद में तत्कालीन सांसद स्वर्गीय राजेश नंदिनी सिंह ने प्रधानमंत्री और रेल मंत्री को पत्र लिखकर इस मांग को मजबूती दी, जिसके बाद रेल मंत्रालय ने प्रारंभिक सर्वे प्रक्रिया शुरू की। समय के साथ परियोजना की गति भले धीमी पड़ी, लेकिन मंडला के सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने इसे पुनर्जीवित करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर अमरकंटक से मंडला, डिंडोरी और नरसिंहपुर तक रेल विस्तार की मांग दोहराई। इसके परिणामस्वरूप 17 जनवरी 2025 को रेल मंत्रालय द्वारा संबंधित निदेशालय को विस्तृत जांच और सर्वे के निर्देश जारी किए गए थे, जिसे इस दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है।
रेल और अधोसंरचना विस्तार का प्रभाव केवल यात्रा सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा। अनूपपुर जिले में प्रस्तावित औद्योगिक विस्तार के साथ मिलकर यह पहल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और सामाजिक ढांचे को नई मजबूती देगी। इसका सीधा और दूरगामी लाभ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक को भी मिलेगा, जहां देश के अनेक राज्यों से हजारों विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। बेहतर रेल, सड़क, परिवहन, बिजली और आवासीय सुविधाओं से छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों को अधिक सुरक्षित, सुलभ और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण प्राप्त होगा।
औद्योगिक विकास और रेल कनेक्टिविटी के विस्तार से विश्वविद्यालय और उद्योगों के बीच अकादमिक–औद्योगिक समन्वय की संभावनाएँ भी बढ़ेंगी। इससे इंटर्नशिप, शोध, कौशल विकास और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। विशेष रूप से जनजातीय, ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए यह विकास आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ठोस कदम साबित होगा। साथ ही अमरकंटक जैसे संवेदनशील सांस्कृतिक और पर्यावरणीय क्षेत्र में संतुलित विकास से पर्यटन, शोध और सांस्कृतिक अध्ययन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
कक्का की चौपाल में वर्षों से यह कहा जाता रहा है कि
“बजट में नाम आना ही पहली जीत है, पटरी बाद में बिछती है।”
रेल बजट 2025-26 ने इसी भरोसे को लौटाने का काम किया है। भले ही अभी यह सर्वे की शुरुआत हो, लेकिन यह स्पष्ट संकेत है कि अमरकंटक, डिंडोरी, मंडला, अनूपपुर, शहडोल और अंबिकापुर अब रेल और विकास की मुख्यधारा में जगह बनाने लगे हैं। यह सिर्फ रेल परियोजनाओं की कहानी नहीं, बल्कि उस जनहितकारी पत्रकारिता और भरोसे की वापसी है, जिसकी प्रतीक्षा यह पूरा अंचल लंबे समय से कर रहा था।

Tags

Leave a Reply

Ad with us

Contact us : admin@000miles.com

Admin

Kailash Pandey
Anuppur
(M.P.)

Categories

error: Content is protected !!