
अनूपपुर (मध्य प्रदेश) – भालूमाड़ा थाना और फुनगा चौकी क्षेत्र में बहने वाली धुम्मा गोडरी नदी पर अवैध रेत उत्खनन का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा। रात के अंधेरे में नदी का सीना छलनी हो रहा है और जिम्मेदार विभागों की चुप्पी अब संदेह के घेरे में है। आखिर किसके संरक्षण में यह पूरा तंत्र बेखौफ चल रहा है?
ग्रामीणों के मुताबिक, एक-एक दिन छोड़कर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ट्रैक्टरों की आवाजाही जारी रहती है। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि सुनियोजित तरीके से रेत निकाली जाती है और अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाई जाती है। मुख्य सड़कों से पहले ही तिराहों पर निगरानी तैनात रहती है, ताकि कार्रवाई की भनक लगते ही ट्रैक्टर मौके से गायब हो जाएं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इन्हें पाल-पोस कौन रहा है? कौन लोग हैं जो संभावित कार्रवाई की पूर्व सूचना तक पहुंचा देते हैं? यदि हर बार छापेमारी से पहले ही ट्रैक्टर फरार हो जाते हैं, तो कहीं न कहीं सूचना तंत्र में सेंध की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। क्या विभागीय तंत्र में बैठे कुछ लोग इस खेल का हिस्सा हैं, या फिर स्थानीय स्तर पर कोई प्रभावशाली संरक्षण मिल रहा है?
लगातार दोहन से नदी का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है। पर्यावरणीय क्षति, जलस्तर में गिरावट और भविष्य के जल संकट की आशंका गहराती जा रही है।
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, सूचना लीक होने के स्रोत का पता लगाया जाए और अवैध खनन में संलिप्त लोगों के साथ-साथ संभावित संरक्षण देने वालों पर भी कठोर कार्रवाई हो। अब प्रशासन की पारदर्शिता और इच्छाशक्ति ही तय करेगी कि धुम्मा गोडरी नदी बचेगी या रेत माफिया का साम्राज्य यूँ ही फलता-फूलता रहेगा।



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