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मौत का इंजेक्शन? मरीज तड़पती रही, डॉक्टर फरार — कब होगा लाइसेंस निरस्त?

मौत का इंजेक्शन? मरीज तड़पती रही, डॉक्टर फरार — कब होगा लाइसेंस निरस्त?


शहडोल/अनूपपुर।
स्वास्थ्य सेवा को सेवा कहा जाता है, लेकिन अगर आरोप सच साबित होते हैं तो बुढ़ार का यह मामला सेवा नहीं, सीधा सौदा प्रतीत होता है। बुढ़ार स्थित स्वास्तिक हेल्थ केयर अस्पताल में कथित तौर पर बिना आवश्यक जांच के इंजेक्शन लगाए जाने से एक महिला की हालत बिगड़ गई। परिजनों का आरोप है कि मरीज की स्थिति गंभीर होने पर डॉक्टर अस्पताल छोड़कर चले गए।
जांच से पहले इंजेक्शन?
परिवार के अनुसार, महिला को चक्कर आने की शिकायत पर अस्पताल लाया गया था। आरोप है कि बिना ब्लड रिपोर्ट, ईसीजी या अन्य परीक्षणों की प्रतीक्षा किए तीन इंजेक्शन लगाए गए। इंजेक्शन के बाद महिला को धुंधला दिखाई देने लगा और हालत बिगड़ गई।
जब परिजनों ने डॉक्टर से सहायता की गुहार लगाई तो कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया। यह भी आरोप है कि डॉक्टर मरीज को गंभीर स्थिति में छोड़कर चले गए।
सवाल सिर्फ एक डॉक्टर पर नहीं
यह मामला केवल एक घटना नहीं, बल्कि उस मानसिकता

पर सवाल है जहाँ मरीज “जिम्मेदारी” नहीं, “जोखिम” बन जाता है।
अगर आरोप सिद्ध होते हैं तो यह चिकित्सा आचार संहिता का गंभीर उल्लंघन है।
कार्रवाई की मांग मामले की शिकायत बुढ़ार थाना में की गई है। परिजन और स्थानीय नागरिक निष्पक्ष जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं
जनता का सीधा सवाल है
अगर किसी डॉक्टर पर बार-बार गंभीर लापरवाही के आरोप लगते हैं,अगर इलाज जान के लिए खतरा बन जाए, तो क्या सिर्फ नोटिस काफी है? क्या दोष सिद्ध होने पर सीधे लाइसेंस निरस्त नहीं होना चाहिए?मरीज अस्पताल भरोसे से जाता है, बहस करने नहीं।डॉक्टर का पहला धर्म इलाज है, अहंकार नहीं।यदि जांच में लापरवाही साबित होती है, तो कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि यह संदेश जाए कि
जान से बड़ा कोई मुनाफा नहीं,और लापरवाही से बड़ा कोई अपराध नहीं।

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Kailash Pandey
Anuppur
(M.P.)

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