महेंद्रगिरि (तमिलनाडु), 6 सितंबर 2026 — भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रोपल्शन रिसर्च कॉम्प्लेक्स (IPRC) में सेमी-क्रायोजेनिक इंजन (SE-2000 / SCE-200) के पावर हेड टेस्ट आर्टिकल (PHTA) का 200 टन (100%) फुल थ्रस्ट पर सफल हॉट परीक्षण किया गया।
यह इस श्रृंखला का 9वां हॉट टेस्ट था, जिसने भविष्य के भारी रॉकेट LVM3 की क्षमता को कई गुना बढ़ाने का रास्ता साफ कर दिया है।
परीक्षण के मुख्य बिंदु
इसरो के अनुसार, यह परीक्षण पूरी तरह सफल रहा और इंजन के सभी पैरामीटर उम्मीद के मुताबिक पाए गए:
- परीक्षण की तारीख: 5 सितंबर 2026
- परीक्षण का प्रकार: पावर हेड टेस्ट आर्टिकल (PHTA) — बिना थ्रस्ट चैंबर के परीक्षण
- कुल अवधि: 35 सेकंड (जिसमें 5 सेकंड तक इंजन को 100% फुल थ्रस्ट पर चलाया गया)
- थ्रस्ट क्षमता: 200 टन (2,000 kN) — फुल रेटेड लेवल
- विकासकर्ता: लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (LPSC), ISRO
47% से 100% थ्रस्ट तक का सफर
इसरो ने इस अत्याधुनिक इंजन को धीरे-धीरे अलग-अलग थ्रस्ट स्तरों पर परखकर तैयार किया है:
- मार्च 2025: पहला इग्निशन परीक्षण (2.5 सेकंड) हुआ।
- साल 2025: पहले 94 टन (47%) और फिर 120 टन (60%) थ्रस्ट पर टेस्ट किया गया।
- 24 जून 2026: 175 टन (88%) थ्रस्ट पर परीक्षण, जहां टर्बोपम्पों ने 400 और 500 बार के भारी आउटलेट प्रेशर को सफलता से संभाला।
- 5 सितंबर 2026: आखिरकार 200 टन (100%) फुल थ्रस्ट का लक्ष्य हासिल किया गया।
क्या हैं SE-2000 इंजन की तकनीकी विशेषताएं?
यह इंजन भारत के अब तक के इंजनों से काफी अलग और शक्तिशाली है:
- प्रोपेलेंट (ईंधन): इसमें ईंधन के रूप में द्रव ऑक्सीजन (LOX) और परिष्कृत केरोसीन (Isrosene) का उपयोग किया जाता है।
- साइकिल: यह ‘ऑक्सीडाइज़र-रिच स्टेज्ड कम्बशन साइकिल’ पर काम करता है।
- चैंबर प्रेशर: 180 बार, जो इसकी उच्च दक्षता को दर्शाता है।
- स्पेसिफिक इम्पल्स: 335 सेकंड।
कहाँ होगा इस इंजन का इस्तेमाल और क्या होगा फायदा?
इस शक्तिशाली इंजन को इसरो के सबसे भारी रॉकेट LVM3 (GSLV Mk-III) के अपग्रेडेड वर्जन के सेमी-क्रायोजेनिक कोर स्टेज (SC120) में लगाया जाएगा।
- बढ़ेगी पेलोड क्षमता: जब इसे नए C32 क्रायोजेनिक अपर स्टेज के साथ जोड़ा जाएगा, तो LVM3 भारी अंतरिक्ष यानों को अंतरिक्ष में ले जाने में सक्षम हो जाएगा।
- मिशन 2027: अपग्रेडेड LVM3 को साल 2027 के आसपास पूरी तरह से ऑपरेशन्स में शामिल करने का लक्ष्य है।
भारत के लिए यह उपलब्धि क्यों है बेहद खास?
- ग्लोबल एलीट क्लब में एंट्री: 200 टन थ्रस्ट की श्रेणी में आकर इसरो अब अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA और रूसी एजेंसी Roscosmos के समकक्ष खड़ा हो गया है।
- भारी मिशनों को मिलेगी रफ्तार: इससे भारत की भारी सैटलाइट्स, गहरे अंतरिक्ष मिशनों (Deep Space Missions) और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी प्रणालियों को भारत से ही लॉन्च करना आसान हो जाएगा।
- अगला कदम: यह सफलता अब पूरे इंजन (थ्रस्ट चैंबर के साथ) के अंतिम क्वालिफिकेशन टेस्ट का रास्ता खोलती है।
“यह परीक्षण पावर हेड के 200 टन (100%) थ्रस्ट स्तर पर स्थिर प्रदर्शन को प्रमाणित करता है। यह स्वदेशी सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के विकास में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है।”
— इसरो (ISRO)