जेडीए के अफसरों पर गम्भीर आरोप, गार्डन की जमीन का भी बंदरबांट, असली किसानों के हिस्से में आया भटकाव
जबलपुर विकास प्राधिकरण में भृष्टाचार करने वालों ने सारी हदें पार कर दी हैं। अफसरों ने दलालों को दे दिये किसानों के प्लॉट
योजना क्रमांक-31 का है। जिसमें दस्तावेजों में हेरफेर कर असली जमीन मालिक मुआवजा पाने भटक रहे हैं और घूस देने वालों को को प्लॉट की रेबड़ी बांटी जा रही है। इनकी शिकायत की सुनवाई नहीं हो रही है। कई किसान भी कोर्ट की शरण में हैं।
-ऐसा है प्लाटों का गोलमाल
नियमों को ताक पर रखकर किसानों को मिलने वाला मुआवजा उसी योजना में न देकर दूसरी योजनाओं एडजस्ट किया जा रहा है। ये आरोप शिकायतकर्ताओं के द्वारा लगाए गए हैं।
-दलालों के हवाले कीमती प्लॉट
शिकायतकर्ता शैलेन्द्र व प्रशांत का आरोप है कि जेडीए के अधिकारियों ने किसानों को मुआवजा नहीं दिया बल्कि बिल्डरों व दलालों को प्लॉट एलॉट कर दिए। जिन किसानों की जमीन है वे आज भी भटक रहे हैं। किसानों को यह कहते हुए भटकाया जा रहा है कि योजना क्रमांक-31 बंद हो गई और पीछे के दरवाजे से योजना क्रमांक-31 के नाम पर बेशकीमती योजनाओं में प्लॉट एलॉट कर दिए गए हैं। योजना क्रमांक 41 व 5 में दे दी जमीन शिकायतकर्ता के अनुसार 31 नंबर योजना में आशीष गोंटिया निवासी बचपन स्कूल, गौरव भुर्रक के नाम की जमीन में मुआवजा स्वरूप नोटराइज चुकता नामा के आधार पर शिवम गुप्ता निवासी महाकाली वार्ड देवरी, अभिषेक शर्मा निवासी राइट टाउन के नाम पर बेशकीमती योजना 5 व 41 में प्लॉट एलॉट कर दिए गए। नियम के अनुसार योजना क्रमांक-31 में ही प्लॉट इन्हें देने थे अगर योजना चालू है तो।
-ऐसा है ये खेल
जमीन मालिक को छोड़ दूसरे को दिए प्लॉट योजना क्रमांक-64 में राजेश कुमार गुप्ता की जमीन थी। यह जमीन योजना में आने के बाद खसरा नंबर 12/2 रकबा 0.790 हेक्टेयर भूमि कि 20 प्रतिशत भूमि समझाैते में प्लॉट विकसित कर इन्हें दी जानी थी पर इन्हें प्लॉट एलॉट न करते हुए दूसरे को इनकी जमीन में प्लॉट दे दिए और इन्हें दो किलोमीटर दूर प्लॉट दिए जाने को कहा जा रहा है।
-गार्डन की जमीन भी लगा दी ठिकाने
गार्डन मद की जमीन में दे दिए प्लाॅट 50 मीटर चौड़ी रोड से सटी भूमि में प्लाॅट क्रमांक डी-2, डी-3, डी-4 के रूप में 54 सौ वर्गफीट जमीन एलॉट कर दी, जबकि उन्हें 4107 वर्ग फीट के प्लाॅट दिए जाने थे पर लगभग 13 सौ वर्गफीट अतिरिक्त भूमि एलॉट कर दी, वह भी चौथे व्यक्ति को। भूमि का लीजडीड शैलेष कुमार जैन व कविता जैन (अनंत इंवेस्टमेंट) के नाम पर बनाई गई और जमीन मालिक मुआवजा पाने भटक रहे हैं।



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