
भोपाल मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार ने राज्य में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का फिजिकल वेरिफिकेशन (भौतिक सत्यापन) कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पांच दिनों के भीतर वक्फ बोर्ड की सभी संपत्तियों की विस्तृत जानकारी सरकार को सौंपनी होगी। इसमें वे संपत्तियां भी शामिल होंगी, जो अतिक्रमण के दायरे में आती हैं या जिनके मालिक भारत-पाक विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए थे।
संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड भी होगा तैयार
राजस्व विभाग की मदद से संपत्तियों का डेटा सरकारी पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। यह सर्वेक्षण संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को रिपोर्ट भेजने के लिए किया जा रहा है। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने जानकारी दी कि कई जानकारियां पहले ही दिल्ली भेजी जा चुकी हैं। राज्य सरकार द्वारा अतिक्रमण संबंधित रिपोर्ट सर्वे के बाद भेजी जाएगी।
कांग्रेस ने सरकार के फैसले पर उठाए सवाल
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इस सर्वेक्षण पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जेपीसी की कार्यप्रणाली पर संदेह हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि कुछ पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए की जा रही है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इतनी बड़ी संख्या में संपत्तियों का सत्यापन मात्र पांच दिनों में संभव नहीं है।
आरिफ मसूद ने सरकार को सर्वेक्षण की समय-सीमा बढ़ाने के लिए पत्र लिखने की बात भी कही।
राजनीतिक और कानूनी जटिलताओं के बीच आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, यह सर्वेक्षण अतिक्रमण को लेकर महत्वपूर्ण हो सकता है, सरकार का कहना है कि वक्फ संपत्तियों के उचित उपयोग और अतिक्रमण मुक्त करने के लिए यह कदम जरूरी है।



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