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फ्लाईओवर में दरारें,जांच से बचाने अफसरों को थमाया ट्रांसफर

फ्लाईओवर में दरारें,जांच से बचाने अफसरों को थमाया ट्रांसफर



चार सदस्यीय कमेटी करेगी भृष्टाचार के आरोपों की जांच, लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने साधी चुप्पी, हड़कंप
जबलपुर। जबलपुर के निर्माणाधीनप्रदेश के सबसे बड़े फ्लाईओवर में दरारें आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। इससे पहले भी फ्लाईओवर की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें की जा चुकी हैं। लोक निर्माण विभाग के अफसरों ने जांच की जद में आने वाले अफसरों को इन्वेस्टिगेशन से बचाने ट्रांसफर थमा दिया है। वहीं शिकायतों की जांच के लिये कमेटी गठित की है। तबादला आदेश पीडब्ल्यूडी के उप सचिव नियाज अहमद खान के नाम से जारी किया गया है।
-चीफ इंजीनियर को भेजा रीवा
विभाग ने जबलपुर परिक्षेत्र के प्रभारी चीफ इंजीनियर एससी वर्मा को रीवा भेज दिया है। उनकी जगह सागर में पदस्थ आरएल वर्मा को तैनात किया गया है।
प्रमुख अभियंता भोपाल द्वारा निर्माण कार्यों की जांच के लिए एक 4 सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है| इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई और हड़कंप की स्थिति है।  जबलपुर लोक निर्माण मंत्री का गृह जिला होने के कारण हलचल अधिक है। जांच  कमेटी में जीपी वर्मा अधीक्षण यंत्री, जीके झा सेतुमंडल ग्वालियर, कुलदीप सिंह के अलावा भवन प्रयोगशाला अनुसंधान भोपाल के अजय कुलकर्णी को सदस्य के रुप में शामिल किया गया है। जांच कमेटी से 15 दिन के अंदर रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है। इस बीच मप्र शासन लोक निर्माण के उपसचिव नियाज अहमद खान के द्वारा जारी आदेश के तहत जबलपुर में पदस्थ अधीक्षण यंत्री एससी वर्मा प्रभारी मुख्य अभियंता लोक निर्माण परिक्षेत्र जबलपुर को इसी पद और इसी प्रभार पर रीवा स्थानांतरित कर दिया गया है।
-शुरुआत से ही आरोपों में रही गुणवत्ता
शिकायत में कहा गया है कि फ्लाईओव्हर निर्माण कार्य की शुरुआत के समय से ही सड़क चटकने लगी थी, जो निर्माण में गड़बड़ी का इशारा करती है। वहीं अधिकारी पर मनमानी, लापरवाही के भी आरोप लग रहे थे। मामले को संज्ञान में लेते हुए राज्य सरकार ने जांच के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी राज्य स्तर पर गंभीरता से जांच करेगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करेगी।

विभाग बदलने पर भी सवाल
आरोप लग रहा है कि पीडब्ल्यूडी में ब्रिज डिपार्टमेंट है, जो फ्लाईओवर निर्माण के लिए जिम्मेदार होता है। फिर भी, इस काम को बिल्डिंग एंड रोड डिपार्टमेंट को सौंपा गया है, जिसका नेतृत्व एक चीफ इंजीनियर कर रहे हैं। सवाल उठता है कि जब ब्रिज डिपार्टमेंट इस तरह के निर्माण कार्य में प्रशिक्षित है, तो यह जिम्मेदारी क्यों बदली गई।
कार्रवाई पर सबकी नजरें
अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच कमेटी की सिफारिशों के बाद सरकार किस तरह से कार्रवाई करती है। यह फ्लाईओवर मदन महल से लेकर महानद्दा तक  जाएगा, जबकि दूसरी लाइन दमोह नाका तक जाएगी। इस परियोजना का कुल अनुमानित खर्च करीब 1 हजार करोड़ रुपये है। चार साल पहले शुरू हुए इस निर्माण में अब तक केवल महानद्दा लाइन का निर्माण पूरा हो पाया है, जबकि दमोह नाका तक का काम अभी भी अधूरा है।

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