
“अरविंद केजरीवाल निश्चित रूप से भगवान की तरह हैं। मैंने हमेशा कहा है कि वह कृष्ण के अवतार हैं। जब भी कोई समाज में बदलाव लाने की कोशिश करता है, खासकर जब वे गरीबों के लिए मसीहा बनने की कोशिश करते हैं, तो सामाजिक ‘कंस’ (बुरी ताकतें) उनके पीछे आ जाती हैं।”
ओझा की इस टिप्पणी को राजनीतिक गलियारों में चाटुकारिता के रूप में देखा जा रहा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आगामी दिल्ली विधानसभा चुनावों में केजरीवाल की लोकप्रियता को भुनाने के उद्देश्य से दिया गया है। ओझा, जो UPSC परीक्षाओं के लिए छात्रों को कोचिंग देने के लिए जाने जाते हैं, हाल ही में AAP में शामिल हुए हैं और उन्हें पटपड़गंज विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। कई लोगों ने ओझा की टिप्पणी को अतिशयोक्ति और राजनीतिक लाभ के लिए की गई चापलूसी करार दिया है, जबकि कुछ समर्थकों ने इसे केजरीवाल के कार्यों की सराहना के रूप में देखा है।
राजनीतिक व्यंग्यकारों ने इस घटना को लेकर तीखी टिप्पणियां की हैं। एक प्रमुख व्यंग्यकार ने लिखा, “राजनीति में भगवानों की एंट्री हो गई है। अब देखना है कि जनता किस अवतार को वोट देती है।”
इस विवादित बयान के बाद अवध ओझा और AAP की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। क्या यह बयान वाकई केजरीवाल की छवि को मजबूत करेगा या फिर पार्टी के लिए नई चुनौतियां खड़ी करेगा, यह तो आगामी चुनाव परिणाम ही बताएंगे।



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