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वकीलों पर पत्रकारिता प्रतिबंधित, बीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट में रखी सख्त दलील

वकीलों पर पत्रकारिता प्रतिबंधित, बीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट में रखी सख्त दलील


नई दिल्ली। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया कि प्रैक्टिसिंग वकीलों के लिए पत्रकार के रूप में काम करना प्रतिबंधित है। बीसीआई ने यह दलील पेश की कि वकीलों के लिए ऐसी दोहरी भूमिकाएं उनके पेशे के नियमों और नैतिकताओं के खिलाफ हैं।
बीसीआई ने कोर्ट को बताया, “पूर्णकालिक पत्रकारिता वकीलों के लिए स्पष्ट रूप से अस्वीकार्य है।” उन्होंने कहा कि यहां तक कि अंशकालिक पत्रकारिता को भी सामान्यत अनुमति नहीं दी जाती। बीसीआई ने अपने बयान में वकालत के पेशे की गरिमा और निष्पक्षता को बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।
क्या कहा गया बीसीआई की ओर से?
बीसीआई का तर्क है कि
दोहरी भूमिकाओं से टकराव पत्रकारिता और वकालत दोनों ही स्वतंत्रता और निष्पक्षता की मांग करते हैं। लेकिन इन भूमिकाओं में टकराव होने से वकील की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
पेशे की गरिमा का संरक्षण वकालत एक ऐसा पेशा है जो अपने उच्च नैतिक मानकों और गरिमा के लिए जाना जाता है। किसी अन्य पेशे, विशेषकर पत्रकारिता, में शामिल होना इन मानकों को कमजोर कर सकता है।संवेदनशील जानकारी का जोखिम: वकील अपने मामलों में गोपनीय जानकारी के संरक्षक होते हैं। पत्रकारिता में संलग्न होने पर ऐसी जानकारी लीक होने का खतरा बढ़ सकता है।
क्या है बीसीआई के नियम?
बीसीआई के नियमों के तहत प्रैक्टिसिंग वकील अन्य व्यवसायों में शामिल नहीं हो सकते।
वकीलों को उनके पेशे से संबंधित सभी कार्यों में संलग्न रहना होता है, जो उनकी पेशेवर प्रतिबद्धताओं के साथ जुड़ा हुआ है।
पत्रकारिता जैसे कार्यों में संलग्न होने से वकील की पेशेवर जिम्मेदारियां प्रभावित हो सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट में क्यों पहुंचा मामला?
यह मामला उस समय सामने आया जब एक वकील, जो पत्रकारिता में भी संलग्न थे, ने सुप्रीम कोर्ट से अपने अधिकारों की व्याख्या करने का अनुरोध किया। वकील ने तर्क दिया कि संविधान के तहत उन्हें अपने पेशे के साथ-साथ पत्रकारिता करने का अधिकार है।
बीसीआई का सख्त रुख
बीसीआई ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा, “पत्रकारिता जैसे पेशे में शामिल होना वकालत की प्रकृति के विपरीत है। एक वकील को अपनी प्राथमिकता और प्रतिबद्धता केवल वकालत के पेशे के प्रति ही होनी चाहिए।”
अंशकालिक पत्रकारिता पर क्या कहा गया?
बीसीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि न केवल पूर्णकालिक, बल्कि अंशकालिक पत्रकारिता भी सामान्यतः स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि वकीलों के लिए यह जरूरी है कि वे केवल अपने पेशे पर ध्यान केंद्रित करें और किसी अन्य व्यवसाय में शामिल न हों।
बीसीआई का यह कदम वकालत के पेशे की मर्यादा को बनाए रखने और वकीलों की भूमिका को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर फैसला देगा कि क्या वकीलों को पत्रकारिता जैसे अन्य व्यवसायों में शामिल होने की अनुमति दी जा सकती है या नहीं।
यह मामला वकालत और पत्रकारिता जैसे दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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