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सरकार संविदा मामलों में निष्पक्षता व बिना भेदभाव कार्य के लिए बाध्य  हाई काेर्ट

सरकार संविदा मामलों में निष्पक्षता व बिना भेदभाव कार्य के लिए बाध्य  हाई काेर्ट


-टिप्पणी के साथ याचिकाकर्ता को मध्यस्थता अधिकरण जाने किया स्वतंत्र

जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी व न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने अपनी महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि सरकार संविदा मामलों में निष्पक्षता व बिना भेदभाव कार्य के लिए बाध्य है। याचिकाकर्ता के साथ 45 दिन के भीतर शिकायत निवारण की संविदा शर्त का उल्लंघन करने की गलती हुई है। इसलिए उसे मध्य प्रदेश मध्यस्थता अधिकरण जाने की स्वतंत्रता प्रदान की जाती है।
याचिकाकर्ता बैतूल जिले की मेसर्स देशमुख कृषि एजेंसी की ओर से अधिवक्ता अधिवक्ता असीम त्रिवेदी, सुशील कुमार तिवारी, आनंद शुक्ला व विनीत टेहनगुरिया ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता का कार्य ठेका समाप्त कर नई एजेंसी को ठेका दे दिया गया। संविदा शर्त के अनुसार याचिकाकर्ता की शिकायत का 45 दिन में निराकरण अनिवार्य था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इस तरह साफ है कि सरकार ने स्वयं के प्रविधान का उल्लंघन किया है। यही नहीं याचिकाकर्ता को नैसर्गिक न्याय सिद्धांत के अनुरूप सुनवाई का अवसर भी नहीं दिया गया।

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