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नई दिल्ली / मनीला: वैश्विक रक्षा परिदृश्य से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने बीजिंग से लेकर वाशिंगटन तक के सैन्य रणनीतिकारों को हैरान कर दिया है। फिलीपींस मरीन कॉर्प्स (Philippine Marine Corps) के हालिया गुप्त सैन्य अभ्यासों और कंप्यूटर सिमुलेशन्स (Wargames) से यह बड़ा खुलासा हुआ है कि चीन की नौसेना (PLAN) के सबसे आधुनिक गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स और उनका तथाकथित ‘अभेद्य’ एयर डिफेंस सिस्टम (ADS), भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के सामने पूरी तरह लाचार साबित हुए हैं।

इस सिमुलेशन रिपोर्ट ने चीनी सैन्य दावों की पोल खोल दी है, जो अपने ‘टाइप 052D’ और ‘टाइप 055’ क्लास डिस्ट्रॉयर्स को दुनिया के सबसे सुरक्षित युद्धपोत बताते रहे हैं।


वह गुप्त सिमुलेशन जिसने बीजिंग में खलबली मचाई

सैन्य सूत्रों के अनुसार, फिलीपींस ने अपने तटों की सुरक्षा की समीक्षा करने के लिए एक हाई-टेक कॉम्बैट सिमुलेशन का आयोजन किया था। इसमें काल्पनिक रूप से चीनी नौसेना के एक बड़े बेड़े (Naval Fleet) को दक्षिण चीन सागर में आगे बढ़ते हुए दिखाया गया था।

  • रक्षा प्रणालियों का परीक्षण: फिलीपींस के पास मौजूद कई पश्चिमी और एशियाई मिसाइल प्रणालियों से इस बेड़े पर काउंटर-अटैक किया गया।
  • परिणाम: चीनी एयर डिफेंस ने कुछ पारंपरिक और सबसोनिक (धीमी गति वाली) मिसाइलों को तो हवा में ही इंटरसेप्ट (नष्ट) कर दिया, लेकिन जैसे ही ब्रह्मोस (BrahMos) को फायर किया गया, चीन का पूरा डिफेंस ग्रिड ध्वस्त हो गया। ब्रह्मोस ने बिना ट्रैक हुए चीनी युद्धपोतों के मुख्य कमांड स्ट्रक्चर को सीधे हिट किया।

ब्रह्मोस की ‘अजेय’ तिकड़ी: स्पीड, स्टील्थ और सी-स्किमिंग

रक्षा विशेषज्ञों ने इस बात का बारीकी से विश्लेषण किया है कि आखिर चीन का अरबों डॉलर का एयर डिफेंस नेटवर्क ब्रह्मोस को क्यों नहीं पकड़ पाया। इसके पीछे तीन मुख्य तकनीकी कारण हैं:

  • मच 2.8 की घातक रफ्तार (Kinetic Energy): ब्रह्मोस ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज उड़ती है। इसका मतलब है कि यह लगभग 1 किलोमीटर प्रति सेकंड की दूरी तय करती है। चीन के एयर डिफेंस राडार को जब तक मिसाइल की मौजूदगी का सिग्नल मिलता है और वह अपनी इंटरसेप्टर मिसाइल को कमांड भेजता है, तब तक ब्रह्मोस टारगेट के बेहद करीब पहुंच चुकी होती है।
  • अल्ट्रा-लो सी-स्किमिंग प्रोफाइल (Sea-Skimming): समंदर के ऊपर हमला करते समय ब्रह्मोस पानी की सतह से महज 10 से 15 मीटर की ऊंचाई पर उड़ती है। पृथ्वी की गोलाई (Earth’s Curvature) के कारण जहाजों पर लगे राडार इतनी कम ऊंचाई पर आ रही मिसाइलों को तब तक नहीं देख पाते जब तक कि वह बिल्कुल क्षितिज (Horizon) के पार न आ जाए। चीन के राडार के लिए यह ‘ब्लाइंड स्पॉट’ (Blind Spot) साबित हुआ।
  • स्टीप-डाइव अटैक (Steep-Dive Maneuver): अपने आखिरी चरण में ब्रह्मोस अचानक ऊपर उठती है और फिर 90-डिग्री के कोण पर सीधे युद्धपोत के डेक के ऊपर गिरती है। जहाजों के एयर डिफेंस सिस्टम आमतौर पर क्षैतिज (Horizontal) हमलों को रोकने के लिए बने होते हैं, लंबवत (Vertical) नहीं।

‘लुआन स्ट्रेट’ और साउथ चाइना सी में नया ‘नो-गो ज़ोन’

भारत द्वारा फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल की डिलीवरी और उसकी उत्तरी लुआन (Northern Luzon) में तैनाती ने चीन के रणनीतिक समीकरण को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। यह इलाका ताइवान स्ट्रेट और दक्षिण चीन सागर के मुहाने पर स्थित है।

  • चीनी नौसेना की घेराबंदी: अब चीन का कोई भी युद्धपोत या जासूसी जहाज अगर इस इलाके में घुसपैठ की कोशिश करता है, तो वह सीधे ब्रह्मोस की जद में होगा।
  • इंडोनेशिया और वियतनाम का फैक्टर: फिलीपींस के बाद भारत की इंडोनेशिया के साथ भी ब्रह्मोस को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है। वियतनाम भी इसे खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहा है। अगर इन तीनों देशों के पास ब्रह्मोस बैटरियां तैनात हो जाती हैं, तो दक्षिण चीन सागर में चीन का एकछत्र राज हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।

विशेषज्ञ की राय (Expert Opinion):

“ब्रह्मोस का यह सिमुलेशन नतीजा यह साबित करता है कि रफ्तार ही आधुनिक युद्ध का नया स्टील्थ (अदृश्यता) है। चीन ने हमेशा अपने राडार और एयर डिफेंस की तारीफों के पुल बांधे हैं, लेकिन ब्रह्मोस जैसी ‘काइनेटिक एनर्जी’ मिसाइल का मुकाबला करने की तकनीक फिलहाल बीजिंग के पास नहीं है।”
— कैप्टन (रिटायर्ड) आर. के. शर्मा, नौसेना रणनीतिकार

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