ग्वालियर/भोपाल (मध्य प्रदेश):मध्य प्रदेश में विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रशासनिक शिथिलता, किसान संकट और हालिया कानूनी-संवैधानिक फैसलों को लेकर सड़कों पर उतरने का मन बना लिया है। ग्वालियर-चंबल अंचल को इस आंदोलन का मुख्य केंद्र बनाया गया है, जहां 25 नवंबर को एक विशाल जनसभा के बाद हजारों कांग्रेसी कार्यकर्ता दिल्ली की ओर प्रस्थान करेंगे। राजनैतिक पंडितों का मानना है कि यह आंदोलन आगामी चुनावों के लिए कांग्रेस का एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन साबित हो सकता है।
🎯 आंदोलन के 4 मुख्य रणनीतिक मुद्दे: क्यों घेरा जा रहा है सरकार को?
कांग्रेस इस महाआंदोलन के जरिए मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार और केंद्र की मोदी सरकार को चार सबसे संवेदनशील मोर्चों पर घेरने की तैयारी में है:
- खाद और उर्वरक का भीषण संकट: [अमर उजाला की रिपोर्ट] के मुताबिक प्रदेश के मालवा, बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल संभाग में रबी फसलों की बुवाई के समय किसानों को डीएपी (DAP) और यूरिया खाद की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। सोसायटियों के बाहर किसानों की लंबी कतारें और प्रशासनिक विफलता को कांग्रेस मुख्य मुद्दा बना रही है।
- OBC आरक्षण पर हाई कोर्ट का फैसला: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा 27% ओबीसी आरक्षण कानून को असंवैधानिक घोषित किए जाने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने अदालत में पिछड़ों का पक्ष और जरूरी सांख्यिकीय डेटा मजबूती से नहीं रखा, जिससे यह कानून रद्द हुआ।
- आदिवासी और दलित हक: प्रदेश में हाल के दिनों में सामने आईं कुछ प्रशासनिक व सामाजिक घटनाओं को लेकर कांग्रेस आदिवासी अधिकारों और दलित उत्पीड़न के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने जा रही है।
- बढ़ती बेरोजगारी और अटकी भर्तियां: युवाओं के बीच रोजगार के अवसरों की कमी और विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में हो रही देरी को लेकर कांग्रेस युवाओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में है।
🗺️ ग्वालियर-चंबल को ही क्यों चुना गया केंद्र?
राजनैतिक विश्लेषकों के अनुसार, ग्वालियर को इस आंदोलन की शुरुआत के लिए चुनना कांग्रेस की एक सोची-समझा रणनीति का हिस्सा है:
- राजनैतिक प्रभाव: ग्वालियर-चंबल अंचल हमेशा से मध्य प्रदेश की सत्ता का पावर सेंटर रहा है।
- दिल्ली से भौगोलिक निकटता: ग्वालियर से दिल्ली की दूरी सड़क और रेल मार्ग द्वारा बेहद सुगम है, जिससे ‘दिल्ली कूच’ के दौरान रास्ते में आने वाले उत्तर प्रदेश और हरियाणा के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी राजनैतिक माहौल गरमाया जा सके।
- अंचल के बड़े नेताओं की साख: इस क्षेत्र में प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं की साख दांव पर लगी है, जिससे कार्यकर्ताओं को लामबंद करना काफी आसान होगा।
🗣️ बयानों का दौर और गरमाई सियासत
कांग्रेस के इस ऐलान के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है:
“भारतीय जनता पार्टी की सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है। किसान खाद के लिए तड़प रहा है, युवा रोजगार के लिए भटक रहा है और ओबीसी वर्ग के अधिकारों पर कुठाराघात हुआ है। 25 नवंबर को ग्वालियर की धरती से जो हुंकार उठेगी, उसकी गूंज दिल्ली के सिंहासन तक सुनाई देगी।”
— वरिष्ठ कांग्रेस नेता, मध्य प्रदेश पीसीसी
दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ भाजपा ने इसे कांग्रेस की हताशा का प्रतीक बताया है। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है और सरकार हर वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है; कांग्रेस केवल राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए जनता को गुमराह कर रही है।
📝 आगे क्या? (Next Steps)
25 नवंबर की इस रैली को सफल बनाने के लिए कांग्रेस ने जिला और ब्लॉक स्तर पर संयोजकों की नियुक्तियां शुरू कर दी हैं। अक्टूबर और नवंबर के महीनों में पूरे प्रदेश में छोटी-छोटी बैठकें कर एक लाख से अधिक लोगों को ग्वालियर लाने का लक्ष्य रखा गया है।