स्टॉकहोम (स्वीडन): ब्रह्मांड के सुदूर कोनों से आने वाले उन अदृश्य कणों को पकड़ना, जो हमारी धरती, पहाड़ों और यहाँ तक कि हमारे शरीर के पार भी बिना कोई सुराग छोड़े निकल जाते हैं, विज्ञान की दुनिया में असंभव माना जाता था। लेकिन इस असंभव को संभव कर दिखाने के लिए वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जन (Francis Halzen) को इस वर्ष के सबसे प्रतिष्ठित भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्होंने अंटार्कटिका की हाड़ कंपा देने वाली ठंड में दुनिया की सबसे अनोखी दूरबीन ‘आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी’ (IceCube Neutrino Observatory) बनाकर ब्रह्मांड के गहरे रहस्यों से पर्दा उठाया है।
👻 क्या होते हैं ये ‘भूतिया कण’ (Neutrinos)?
वैज्ञानिक भाषा में इन्हें न्यूट्रिनो (Neutrinos) कहा जाता है। ये उप-परमाणु कण (Subatomic Particles) होते हैं जिनका कोई विद्युत आवेश (Charge) नहीं होता और द्रव्यमान (Mass) न के बराबर होता है।
- हर सेकंड हमारे शरीर के पार: सूरज, तारों और ब्लैक होल के टकराने से हर सेकंड अरबों-खरबों न्यूट्रिनो पैदा होते हैं। इस वक्त भी आपकी एक उंगली के नाखून जितने हिस्से से हर सेकंड लगभग 100 अरब न्यूट्रिनो आर-पार गुजर रहे हैं, लेकिन हमें इसका पता नहीं चलता।
- इन्हें ‘भूत’ क्यों कहते हैं? क्योंकि ये किसी भी सामान्य पदार्थ से टकराते नहीं हैं। ये लोहे की दीवार, पूरी पृथ्वी या किसी भी ग्रह के आर-पार ऐसे निकल जाते हैं जैसे वह कोई खाली जगह हो। इसी अदृश्य और मायावी व्यवहार के कारण इन्हें विज्ञान की दुनिया में ‘घोस्ट पार्टिकल्स’ या भूतिया कण कहा जाता है।
❄️ अंटार्कटिका की बर्फ के नीचे बनी ‘अनोखी लैब’
फ्रांसिस हाल्जन और उनकी टीम ने इन भूतिया कणों को पकड़ने के लिए पृथ्वी के सबसे ठंडे इलाके अंटार्कटिका के साउथ पोल को चुना। उन्होंने बर्फ की सतह से करीब 2.5 किलोमीटर नीचे एक विशालकाय दूरबीन बनाई।
- बर्फ क्यों चुनी गई? क्योंकि वहां की बर्फ अत्यधिक दबाव के कारण पूरी तरह पारदर्शी (क्रिस्टल क्लियर) है, जिसमें हवा के बुलबुले भी नहीं हैं।
- कैसे पकड़े जाते हैं कण? जब अंतरिक्ष से आने वाले अत्यधिक ऊर्जावान न्यूट्रिनो अंटार्कटिका की गहरी बर्फ के परमाणुओं से टकराते हैं, तो एक हल्की नीली रोशनी पैदा होती है, जिसे ‘चेरेनकोव रेडिएशन’ (Cherenkov Radiation) कहते हैं। बर्फ में लटकाए गए हजारों डिजिटल ऑप्टिकल मॉड्यूल (DOMs) इस रोशनी को रिकॉर्ड कर लेते हैं।
🚀 इस खोज से मानव जाति को क्या मिलेगा?
इस खोज ने अंतरिक्ष विज्ञान (Astrophysics) का पूरा नजरिया बदल दिया है:
- ब्लैक होल का एक्स-रे: न्यूट्रिनो के जरिए वैज्ञानिक अब ब्रह्मांड के उन सुदूर कोनों, मरते हुए तारों और सुपरमैसिव ब्लैक होल के अंदर देख सकते हैं, जहां से सामान्य प्रकाश या किरणें हम तक कभी नहीं पहुंच सकतीं।
- ब्रह्मांड की उत्पत्ति का सच: यह तकनीक हमें बिग बैंग (Big Bang) के ठीक बाद की स्थितियों को समझने में मदद करेगी, जिससे यह साफ होगा कि हमारा ब्रह्मांड आखिर कैसे बना।
यह पुरस्कार केवल एक वैज्ञानिक की खोज का सम्मान नहीं है, बल्कि यह मानव इतिहास की उस अदम्य जिज्ञासा की जीत है जो अंधेरे और अदृश्य ब्रह्मांड में भी सच को ढूंढ निकालती है।