
लोकायुक्त में मामला दर्ज होने के बाद आरोपी जिला रजिस्ट्रार पर विभाग अब भी बैकफुट पर,छुट्टी लेकर आराम से घर में बैठे आरोपी भदौरिया,लोकायुक्त ने भी की थी एक्शन लेने की मांग
जबलपुर। नियम-कायदों को ठेंगे पर रखते हुये रजिस्ट्रियों को बंधक बनाकर मोटी रकम ऐंठने के आरोप में घिरे धनवंतरी नगर स्थित रजिस्ट्री कार्यालय में पदस्थ जिला रजिस्ट्रार रत्नेश भदौरिया पर अब तक पंजीयन विभाग के भोपाल में बैठे अधिकारी मौन साधे हुये बैठे हैं। लंबी जांच और छानबीन के बाद लोकायुक्त ने
श्री भदौरिया और उनके स्टेनो जयनारायण मिश्रा उर्फ जित्तू के विरुद्ध मामला कायम किया था। इसके बाद खबर थी कि पंजीयन विभाग जल्दी ही भदौरिया पर कार्रवाई करेगा,लेकिन अब तक ऐसा किया नहीं जा सका।
उल्लेखनीय है कि श्री भदौरिया ने शहर के प्रतिष्ठित नामों को भी भदौरिया ने नहीं बख्शा और रजिस्ट्री देने के एवज में लाखों रुपए वसूले। सभी ने शिकायत करना मुनासिब नहीं समझा,बल्कि रुपये देकर रजिस्ट्री छुड़ा ली, लेकिन एक मामले में लोकायुक्त की बारीक जांच के बाद भदौरिया पर कानूनी शिकंजा कस गया।
-साढ़े तीन सौ रजिस्ट्रियों में खेला वसूली का खेल
आरोपित है कि भदौरिया और उनके दलालों का गिरोह प्रत्येक रजिस्ट्री में वसूली का खेल खेलते थे। लोकायुक्त की जांच के अनुसार करीब साढ़े तीन सौ रजिस्ट्रियां ऐसी हैं,जिनमें वसूली की गयी है। जिस मामले में शिकायत की गयी, उसके अनुसार, कठौंदा में खरीदी गई एक कृषि भूमि की रजिस्ट्री में कमियाँ निकालकर भदौरिया व स्टेनो द्वारा 5 लाख की रिश्वत माँगी गई थी। नर्मदा नगर ओल्ड पीपी कॉलोनी निवासी अशोक शर्मा ने लोकायुक्त से शिकायत की, कि उनके मित्र प्रभजीत सिंह बसूर ने कठौंदा में 64 हजार 2 सौ वर्गफीट कृषि भूमि क्रय की थी। इस जमीन की रजिस्ट्री 11 जुलाई 2024 को एनपीजी कंस्ट्रक्शन के नाम पर कराई गई थी। रजिस्ट्री में आवेदक अशोक शर्मा गवाह थे। ये रजिस्ट्री देने के एवज में भदौरिया पांच लाख रुपये मांग रहे थे।
–भदौरिया को क्यों लगता था कि बच जाएंगे
सरकार ने जिला रजिस्ट्रार को रजिस्ट्री
के रिव्यू का पॉवर दिया है। इसी पॉवर की दम पर भदौरिया खुलकर वसूली करते थे और बेफिक्र थे कि बच जाएंगे। भदौरिया इस पॉवर का इस्तेमाल कर जिला रजिस्ट्रार, सब-रजिस्ट्रार द्वारा की गयी रजिस्ट्रार का पुनरीक्षण करते थे और कमियां निकालकर दबाव बनाते थे। हालाकि, रिव्यू के दौरान केवल ये देखा जाना चाहिए कि कहीं टैक्स कम तो नहीं लिया गया या कोई तथ्य छूट तो नहीं गया है। रिव्यू में जाने वाली रजिस्ट्रियां बहुत कम होती हैं,लेकिन भदौरिया ने अपने दफ्तर में की जाने वाली सारी रजिस्ट्रियों को रिव्यू में डालने का नियम बना लिया था। ऐसे में सालों से रजिस्ट्री करा रहे सब-रजिस्ट्रार के कामकाज पर भी प्रश्न चिन्ह उठ रहा था। बाद में जब आवेदक रजिस्ट्री लेने आते थे तो भदौरिया का दलाल नेटवर्क उन्हें 25 प्रतिशत देकर रजिस्ट्री छुड़ाने की सलाह देता था साथ ही चेतावनी भी कि यदि ऐसा नहीं किया तो लंबी पैनाल्टी लगा दी जाएगी।





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