
जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति पीके अग्रवाल की एकलपीठ ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में अग्रिम जमानत अर्जी निरस्त कर दी। आवेदक महिला पर आरोप है कि उसने कमरा किराये से देकर दुष्कर्म में सहयोग किया था। कोर्ट ने साफ किया कि यह मामला गंभीर प्रकृति का है, इसलिए अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती। ग्राम कुंडा, थाना धूमा, तहसील लखनादौन, जिला सिवनी निवासी महिला पर आरोप है कि उसने अपने घर का कमरा दुष्कर्म के आरोपित को किराये पर दिया था। उसी कमरे में नाबालिग को लाकर दुष्कर्म किया गया। आवेदक महिला के सास-ससुर को संदेह हो गया था। इसलिए उन्होंने कमरा किराये से दिए जाने का विरोध भी किया था। लेकिन आवेदक महिला ने उनकी बात नहीं सुनी और मनमानी की। जिसके बाद किरायेदार युवक ने अपने साथ लाई गई नाबालिग के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दे दिया। पुलिस ने मुख्य आरोपित युवक के साथ कमरा किराये से देने वाली महिला को भी सह आरोपित बना लिया। इसीलिए गिरफ्तारी से बचने वह अग्रिम जमानत अर्जी के जरिए हाई कोर्ट की शरण में आई है। उसके वकील ने दलील दी कि जिस नाबालिग के साथ दुष्कर्म हुआ था, उसने एक बच्चे को जन्म दिया है और वह अपने माता-पिता के साथ रह रही है। यही नहीं दुष्कर्म की आरोपित व उसके माता-पिता को भी आरोपित महिला को जमानत दिए जाने को लेकर कोई एतराज नहीं है। हाई कोर्ट ने इस दलीलों को दरकिनार कर अग्रिम जमानत अर्जी निरस्त कर दी।



Leave a Reply