कटनी में रोके गए 163 बच्चों के मामले में परिजनों ने नकारा तस्करी का दावा

कटनी रेलवे स्टेशन पर रोके गए बच्चों के मामले में परिजनों का पक्ष

जबलपुर। ​जबलपुर रेल मंडल के अंतर्गत कटनी रेलवे स्टेशन पर पटना-पुणे एक्सप्रेस से उतारे गए 163 बच्चों के मामले में अब नई स्थिति निर्मित हो गई है। पिछले चार दिनों से पुलिस की निगरानी में रह रहे इन बच्चों के अभिभावक मंगलवार 14 अप्रैल को बिहार के अररिया और आसपास के जिलों से कटनी पहुंचे। जीआरपी थाने में उपस्थित होकर इन परिजनों ने पुलिस द्वारा लगाए गए मानव तस्करी के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अभिभावकों का स्पष्ट कहना है कि वे अपने बच्चों को स्वेच्छा से धार्मिक शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए महाराष्ट्र भेज रहे थे।

​परिजनों ने प्रस्तुत किए पहचान और शिक्षा के दस्तावेज

​जीआरपी कार्यालय पहुंचे अभिभावकों ने पुलिस के समक्ष बच्चों के आधार कार्ड, पहचान पत्र और संबंधित संस्थानों के दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं। परिजनों ने अपने बयानों में दर्ज कराया कि वे आर्थिक रूप से अत्यंत पिछड़े वर्ग से आते हैं और बिहार में संसाधनों के अभाव के कारण उन्होंने बच्चों को महाराष्ट्र के लातूर और नांदेड़ स्थित मदरसों में दाखिला दिलवाया है। उनका तर्क है कि इन संस्थानों में रहने और पढ़ाई की नि:शुल्क व्यवस्था है, जिसके चलते उन्होंने अपने बच्चों को वहां भेजने का निर्णय लिया था। पुलिस की थ्योरी के विपरीत परिजनों ने शिक्षकों के साथ बच्चों के जाने को एक सामान्य प्रक्रिया बताया।

​पुलिस की कार्रवाई और परिजनों की आपत्तियां

​अभिभावकों ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बच्चों को शिक्षकों के साथ उचित किराया देकर भेजा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी ठोस आधार और बिना परिजनों से संपर्क किए इस पूरे मामले को मानव तस्करी का रूप दे दिया गया। अभिभावकों का कहना है कि पुलिस की इस जल्दबाजी भरी कार्रवाई के कारण छोटे बच्चों को इस भीषण गर्मी में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। परिजनों के अनुसार बच्चों का भविष्य संवारने के उद्देश्य से उठाए गए कदम को अपराध की श्रेणी में रखना गलत है।

​चार दिन पूर्व कटनी स्टेशन पर हुई थी बरामदगी

​यह घटनाक्रम चार दिन पहले शुरू हुआ था जब कटनी रेलवे स्टेशन पर गश्त के दौरान जीआरपी और आरपीएफ की टीम ने पटना-पुणे एक्सप्रेस के कोच में बड़ी संख्या में बच्चों को देखा था। एक साथ इतनी तादाद में नाबालिगों को सफर करते देख पुलिस ने संदेह के आधार पर उन्हें ट्रेन से उतार लिया था। प्रारंभिक जांच में इसे संदिग्ध मानव तस्करी का मामला मानते हुए बच्चों के साथ मौजूद शिक्षकों को हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने इन बच्चों को बाल कल्याण समिति की देखरेख में रखा था और उनके घरों पर सूचना भेजी थी।

​जांच के दायरे में शिक्षण संस्थान और यात्रा के उद्देश्य

​परिजनों के दावों के बाद अब पुलिस जांच का रुख बदल सकता है। जीआरपी अब उन मदरसों और शिक्षण संस्थानों की वैधता की जांच कर रही है जहां इन बच्चों को ले जाया जा रहा था। साथ ही बच्चों के साथ सफर कर रहे शिक्षकों के पास मौजूद दस्तावेजों का मिलान परिजनों द्वारा दिए गए कागजों से किया जा रहा है। हालांकि पुलिस ने अभी तक इस मामले में किसी को क्लीन चिट नहीं दी है, लेकिन माता-पिता के बयान दर्ज होने के बाद अब कानूनी प्रक्रिया में दस्तावेजों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। पुलिस यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि बच्चों को वापस सौंपने से पहले सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी हो जाएं।

Tags

Leave a Reply

Ad with us

Contact us : admin@000miles.com

Admin

Kailash Pandey
Anuppur
(M.P.)

Categories

error: Content is protected !!