
शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के मामले में भाई की अपील खारिज, एसडीएम ने दिए बेदखली के आदेश
जबलपुर। जोतपुर गांव में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का एक अनूठा मामला सामने आया है। यहां एक शासकीय कर्मचारी ने अपनी नौकरी बचाने के लिए अतिक्रमण की जिम्मेदारी अपने ही भाई पर डालने का प्रयास किया। हालांकि एसडीएम न्यायालय ने जांच के बाद इस दलील को सिरे से नकारते हुए दोनों भाइयों की मिलीभगत पाई है। राजस्व विभाग की इस कार्रवाई से क्षेत्र के भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों में हड़कंप की स्थिति है।
भाई पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश नाकाम
इस प्रकरण की शुरुआत तब हुई जब तहसीलदार न्यायालय जबलपुर ने जोतपुर निवासी गजराज सिंह के विरुद्ध शासकीय भूमि पर कब्जा करने के आरोप में बेदखली और 20 हजार रुपए अर्थदंड का आदेश जारी किया। इस आदेश के विरुद्ध गजराज सिंह ने एसडीएम जबलपुर के समक्ष अपील दायर की। अपील में गजराज ने तर्क दिया कि खसरा नंबर 45 के रकबा 0.17 हेक्टेयर पर उसका कोई कब्जा नहीं है। उसने दावा किया कि उक्त स्थान पर करीब 50 वर्ष पूर्व उसके पिता ने निर्माण कराया था और वर्तमान में वहां उसके छोटे भाई गोविंद सिंह ने पक्का मकान बना लिया है। गजराज ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वह एक शासकीय सेवक है और उसका घर विवादित स्थल से करीब 150 से 200 फुट दूर है। उसने मांग की थी कि प्रकरण से उसका नाम हटाकर उसके भाई और पिता को पक्षकार बनाया जाए।
जांच में खुली शासकीय कर्मचारी की पोल
एसडीएम अभिषेक सिंह ने जब इस मामले की विस्तृत जांच कराई, तो चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए। पटवारी की प्रतिवेदन रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि खसरा नंबर 45, जो राजस्व अभिलेखों में रास्ता मद के रूप में दर्ज है, उसके 0.17 हेक्टेयर क्षेत्र पर गजराज सिंह ने ही मकान और दुकानों का निर्माण किया है। जांच में यह भी पाया गया कि गजराज सिंह ने चालाकी दिखाते हुए केवल अपनी सरकारी नौकरी का हवाला दिया, लेकिन वह किस विभाग में कार्यरत है, इस जानकारी को जानबूझकर छिपा लिया। प्रशासन के अनुसार गजराज को डर था कि अतिक्रमण सिद्ध होने पर उसकी विभागीय सेवा पर संकट आ सकता है, इसलिए उसने अपने भाई को आगे कर खुद का नाम रिकॉर्ड से विलोपित कराने की योजना बनाई थी।
मिलीभगत से किया गया पक्का अतिक्रमण
प्रकरण की सुनवाई के दौरान राजस्व अधिकारियों ने पाया कि गजराज और गोविंद सिंह दोनों भाई मिलकर शासकीय भूमि का दोहन कर रहे हैं। एसडीएम ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से मिली जुली भूमिका का मामला है। दोनों भाइयों ने मिलकर रास्ते की जमीन पर कब्जा किया और वहां पक्का निर्माण खड़ा कर दिया। अपीलार्थी द्वारा दिए गए तर्क केवल कानूनी कार्रवाई से बचने का एक जरिया मात्र थे। न्यायालय ने माना कि सार्वजनिक रास्ते की भूमि पर अतिक्रमण करना गंभीर अपराध है और इसमें परिवार के सदस्यों की सक्रिय सहभागिता रही है।
पंद्रह दिन में हटाना होगा अवैध निर्माण
सभी तथ्यों और साक्ष्यों के अवलोकन के पश्चात एसडीएम अभिषेक सिंह ने गुरुवार को गजराज सिंह की अपील को खारिज करने का आदेश जारी कर दिया। आदेश में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा गया है कि विवादित भूमि से 15 दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से अतिक्रमण हटाया जाए। इसके साथ ही तहसीलदार द्वारा पूर्व में आरोपित किया गया 20 हजार रुपए का जुर्माना भी तत्काल वसूलने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समयावधि में कब्जा नहीं हटाया गया, तो राजस्व विभाग पुलिस बल की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा और इसका खर्च भी संबंधित पक्ष से वसूला जाएगा।


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