
जब शासन आमजन की चौखट पर खड़ा होकर उनकी बात सुने, जब शिकायतों का समाधान उसी वक्त अधिकारी की मेज पर तय हो जाए—तब प्रशासन सिर्फ ‘तंत्र’ नहीं, बल्कि ‘जनकल्याण’ का जीवंत चेहरा बन जाता है। मध्यप्रदेश के अनूपपुर ज़िले में कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली ने ठीक यही कर दिखाया है। उनकी दूरदर्शिता और संवेदनशील पहल ने जनसुनवाई की पारंपरिक परंपरा को बदलते हुए उसे दृश्य, श्रव्य, उत्तरदायी और पारदर्शी जनसंवाद में बदल दिया है।
अनूपपुर, 10 जून 2025।
शासन और जनता के बीच संवाद की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी—जनसुनवाई—को अब और अधिक प्रभावशाली एवं सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली ने एक अभिनव पहल की है। कलेक्ट्रेट कार्यालय में अनुभागवार जनसुनवाई व्यवस्था का शुभारंभ करते हुए उन्होंने एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया है, जो प्रदेशभर के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।

इस नई प्रणाली के अंतर्गत, जिला मुख्यालय पर सभी अनुभागों के अनुविभागीय राजस्व अधिकारियों, तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों एवं राजस्व निरीक्षकों को एक ही परिसर में अनुभागवार डेस्क के रूप में संगठित किया गया। आमजन को अब अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ते—बल्कि सभी अधिकारी एक स्थान पर उपलब्ध रहते हैं और नागरिक अपनी समस्या सीधे संबंधित अधिकारी को बता सकते हैं।
जनसुनवाई स्थल पर आज का दिन प्रशासनिक सक्रियता और संवेदनशीलता का सजीव उदाहरण बना। परिसर में सुव्यवस्थित डेस्क, अधिकारीगण की गंभीर उपस्थिति, दस्तावेजों के साथ पहुंचे ग्रामीण, महिलाओं की स्पष्ट आवाज़ में समस्याएं और अधिकारियों की गहन सुनवाई—पूरा माहौल जनसरोकार और सेवा भाव से ओतप्रोत था। कहीं वृद्ध अपनी जमीन से जुड़ी समस्या लेकर खड़ा था, तो कहीं एक महिला अधिकारी से विधवा पेंशन की अर्ज़ी पर चर्चा कर रही थी।
आज की जनसुनवाई में कुल 104 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से कई मामलों का समाधान मौके पर ही कर दिया गया। जिन प्रकरणों के लिए फील्ड जांच आवश्यक थी, उन्हें निर्धारित समयसीमा में निराकरण के निर्देश दिए गए।

जनसुनवाई में स्वयं कलेक्टर श्री पंचोली उपस्थित रहे और उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं अधिकारियों के साथ मिलकर गंभीरता से सुनीं। उनकी उपस्थिति न केवल प्रशासनिक भरोसे को मजबूत करती है, बल्कि यह दर्शाती है कि जिले का नेतृत्व सुनता है, समझता है और समाधान करता है।
इस जनसुनवाई में जिला पंचायत सीईओ श्री तन्मय वशिष्ठ शर्मा, अपर कलेक्टर श्री दिलीप कुमार पाण्डेय, एसडीएम अनूपपुर श्री कमलेश पुरी, एसडीएम कोतमा श्री अजीत तिर्की, एसडीएम जैतहरी श्रीमती अंजली द्विवेदी, एसडीएम पुष्पराजगढ़ श्री सुधाकर सिंह बघेल सहित कई अन्य अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि जनसुनवाई केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि वास्तविक समाधान का माध्यम बने।
प्रेरणा और भविष्य की दिशा
यह पहल केवल एक प्रशासनिक प्रयोग नहीं, बल्कि जनसेवा की आत्मा को ज़मीनी रूप देना है। यह नवाचार “लोकतंत्र के लोक-सेवा संस्करण” की मिसाल है, जहाँ अफसर अपनी कुर्सियों से उतरकर जनता के बीच बैठते हैं।
श्री हर्षल पंचोली की यह जनसमर्पित पहल निश्चित ही ‘जनकल्याणकारी प्रशासन’ की परिकल्पना को नया आयाम देती है और अनूपपुर को एक सुशासन मॉडल ज़िला के रूप में स्थापित करती है।

इस तरह की व्यवस्थाएं न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देती हैं, बल्कि जनता और शासन के बीच की दूरी को पाटती भी हैं। कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली की यह सोच दर्शाती है कि अगर नेतृत्व इच्छाशक्ति से भरा हो, तो प्रशासन भी बदलाव की जनआंदोलन जैसी शक्ति बन सकता है।



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