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MP में फरार तहसीलदार पर रेप का केस, कोर्ट की फटकार के बाद भी सिस्टम मेहरबान – पीड़िता ने खुद रखा 50 हजार का इनाम!

MP में फरार तहसीलदार पर रेप का केस, कोर्ट की फटकार के बाद भी सिस्टम मेहरबान – पीड़िता ने खुद रखा 50 हजार का इनाम!



ग्वालियर। मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है, जहां दुष्कर्म का आरोपी तहसीलदार शत्रुघ्न सिंह चौहान पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है। कोर्ट की फटकार के बावजूद प्रशासन उसे पकड़ने में नाकाम साबित हो रहा है। पहले जमीन घोटाले और अब दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोपों से घिरा यह अधिकारी फरार है। पुलिस ने उस पर मात्र 5000 रुपये का इनाम घोषित किया, लेकिन पीड़िता ने खुद आगे आकर 50,000 रुपये का इनाम रख दिया।

पुलिस के लिए चैलेंज बना तहसीलदार, मोबाइल बंद कर रहा चकमा

सूत्रों के मुताबिक, आरोपी तहसीलदार ग्वालियर से बाहर भाग चुका है और मोबाइल बंद कर पुलिस को लगातार चकमा दे रहा है। महिला थाना पुलिस ने अब क्राइम ब्रांच से मदद मांगी है, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली है। आरोप है कि प्रशासन से लेकर शासन तक पूरा सिस्टम उसे बचाने में लगा हुआ है।

17 साल तक शादी का झांसा, फिर रेप और जबरन गर्भपात का आरोप

पीड़िता का आरोप है कि तहसीलदार चौहान ने उसे शादी का झांसा देकर 17 साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में रखा और इस दौरान उसका शोषण करता रहा। महिला का दावा है कि 2014 में उसने एक बेटे को जन्म दिया, लेकिन तहसीलदार ने उसे अपनाने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, आरोपी ने महिला का एक बार गर्भपात भी जबरन कराया।

चार पत्नियां, कई महिलाओं से संबंध और आपराधिक रिकॉर्ड

सरकारी वकील के अनुसार, तहसीलदार चौहान की चार पत्नियां पहले से हैं और कई अन्य महिलाओं से भी उसके अवैध संबंध हैं। इसके अलावा, उस पर हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, संगीन धाराओं में केस दर्ज हैं। इसके बावजूद, वह सरकारी पद पर बना रहा और कोर्ट ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी।

तहसीलदार को बचाने में जुटा सिस्टम, कोर्ट ने भी जताई नाराजगी

इस मामले में पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। पहले जमीन घोटालों में घिरने के बाद भी उसे कोई सख्त सजा नहीं मिली, उल्टा उसे भितरवार से गुपचुप तरीके से बैतूल ट्रांसफर कर दिया गया और पुलिस को इसकी खबर तक नहीं लगी। दुष्कर्म का केस दर्ज होने के बावजूद तहसीलदार के निलंबन का आदेश तक जारी नहीं किया गया।

कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए सवाल उठाया कि “इतने गंभीर आरोपों के बावजूद एक अधिकारी अभी तक नौकरी कर रहा है, यह प्रशासनिक लापरवाही का चरम है।”

बड़ा सवाल – आखिर क्यों नहीं पकड़ पा रही पुलिस?

तहसीलदार चौहान का फरार होना और पुलिस का उसे न पकड़ पाना कई सवाल खड़े करता है। आमतौर पर पुलिस मामूली आरोपियों को जल्दी पकड़ लेती है, लेकिन इस मामले में एक बड़े अधिकारी को बचाने के लिए सिस्टम काम कर रहा है।

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