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मध्य प्रदेश पुलिस थाना खानियाधाना में इंद्र लाल लोधी बने विधायक प्रतिनिधि, प्रीतम लोधी के पत्र ने खड़े किए सवाल

मध्य प्रदेश पुलिस थाना खानियाधाना में इंद्र लाल लोधी बने विधायक प्रतिनिधि, प्रीतम लोधी के पत्र ने खड़े किए सवाल


मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा (क्रमांक 26) में एक अनोखा और विवादास्पद निर्णय सामने आया है। क्षेत्र के भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने पुलिस थाना खानियाधाना में इंद्र लाल लोधी को “विधायक प्रतिनिधि” नियुक्त करने का आदेश जारी किया है। यह नियुक्ति पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।
प्रीतम लोधी ने 20 जनवरी 2025 को अपने आधिकारिक पत्र में इंद्र लाल लोधी को खानियाधाना थाना में “विधायक प्रतिनिधि” के रूप में नियुक्त किया। इस पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि इंद्र लाल लोधी थाने के सभी प्रशासनिक कार्यों, जनता की समस्याओं और शिकायतों को देखेंगे और उनकी निगरानी करेंगे।
पत्र  का उद्देश्य है  जनता की शिकायतें इंद्र लाल लोधी थाना क्षेत्र के निवासियों की समस्याओं को सुनेंगे और उचित समाधान के लिए थानेदार और पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय करे पुलिस कार्रवाइयों पर निगरानी थाने में दर्ज होने वाली शिकायतों और पुलिस की कार्रवाइयों पर उनकी सलाह ली विधायक तक रिपोर्टिंग इंद्र लाल लोधी विधायक प्रीतम लोधी को थाने की स्थिति और जनता की समस्याओं की जानकारी देंगे ।
यह कदम न केवल प्रशासनिक स्वतंत्रता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था के मौलिक सिद्धांतों को भी चुनौती देता है।
पुलिस, जो कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए निष्पक्ष और स्वतंत्र संस्था मानी जाती है, अब राजनीतिक दखल के साए में काम करने को लेकर
“पुलिस थानों में जनता को न्याय मिलने में देरी होती है। इंद्र लाल लोधी जैसे जिम्मेदार व्यक्ति की नियुक्ति से शिकायतों का तेजी से समाधान होगा और लोगों को राहत मिलेगी।
इंद्र लाल लोधी की जिम्मेदारी
इंद्र लाल लोधी, जिन्हें “विधायक प्रतिनिधि” नियुक्त किया गया है, अब थाने में जनता और पुलिस के बीच सेतु की भूमिका निभाएंगे। उन्हें थाने में आने वाले लोगों की समस्याओं को सुनने, पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर समाधान निकालने और पूरे मामले की रिपोर्ट विधायक तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है।
इस नियुक्ति पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस और अन्य दलों ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा
“यह फैसला पुलिस प्रशासन को भाजपा का राजनीतिक कार्यालय बनाने की कोशिश है। पुलिस की स्वतंत्रता को खत्म करने की साजिश हो रही है।
“अगर थाने में विधायक प्रतिनिधि रहेंगे, तो न्याय कहां से मिलेगा? यह जनता के अधिकारों का हनन है।”
इस विवादास्पद निर्णय पर जनता में भी गहरी नाराजगी देखी जा रही है।
एक स्थानीय नागरिक ने कहा “थाने में पहले पुलिस थी, अब विधायक के लोग होंगे। हमें न्याय कैसे मिलेगा?”
सोशल मीडिया पर लोगों ने तंज कसा कि
“क्या अब FIR दर्ज कराने के लिए विधायक प्रतिनिधि की मंजूरी लेनी होगी?”
“खानियाधाना थाना पुलिस स्टेशन या विधायक का कार्यालय?”
प्रशासनिक विशेषज्ञों की राय
प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला संविधान और कानून व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
पुलिस की स्वतंत्रता यह नियुक्ति पुलिस अधिकारियों के काम में हस्तक्षेप का कारण बनेगी।
राजनीतिक दखल से थानों में भ्रष्टाचार और पक्षपात बढ़ सकता है।
जनता का भरोसा कमजोर यह निर्णय जनता के मन में पुलिस और न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करेगा ।
क्या कहते हैं कानूनी प्रावधान?
भारतीय संविधान के अनुसार, पुलिस प्रशासन एक स्वतंत्र इकाई है।
पुलिस एक्ट 1861पुलिस को किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप से बचाने के प्रावधान करता है।
संविधान का अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्रदान करता है।
संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार सुनिश्चित करता है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि विधायक प्रतिनिधि की नियुक्ति इन प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है।
पुलिस थानों में “विधायक प्रतिनिधि” की नियुक्ति केवल प्रशासनिक व्यवस्था में राजनीतिक दखल को बढ़ावा देता है। यह न केवल जनता के अधिकारों पर चोट है, बल्कि प्रशासन और राजनीति के बीच की सीमाओं को भी धुंधला करता है।
पुलिस थाना खानियाधाना में इंद्र लाल लोधी की “विधायक प्रतिनिधि” के रूप में नियुक्ति ने एक गंभीर बहस छेड़ दी है। यह देखना होगा कि यह निर्णय जनता की भलाई के लिए है या राजनीतिक हित साधने का नया तरीका।
मध्य प्रदेश में इस प्रकार का कदम लोकतंत्र, प्रशासनिक स्वतंत्रता और कानून व्यवस्था के लिए क्या संकेत देता है, यह भविष्य के घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।

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