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पशु तस्करी कहानी के मुख्य पात्र हर बार पुलिस की पकड़ से बाहर!

पशु तस्करी कहानी के मुख्य पात्र हर बार पुलिस की पकड़ से बाहर!



अनूपपुर (म.प्र.)
पशु तस्करी का गोरखधंधा जिले में लगातार जारी है। पुलिस नाकाबंदी करके ट्रकों को पकड़ने में तो सफल हो जाती है, लेकिन असली तस्कर हर बार पुलिस की पकड़ से बच निकलते हैं। हाल ही में भालूमाड़ा पुलिस ने 26 मवेशियों से भरे एक ट्रक को पकड़ा, लेकिन ट्रक चालक और खलासी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए।
हर बार मुख्य गुनहगार बच निकलते हैं”
मुखबिर की सूचना पर भालूमाड़ा पुलिस ने चमन चौक फुनगा नेशनल हाईवे 43 पर नाकाबंदी की। ट्रक (UP 73 A 6482) को रोका गया, जिसमें मवेशियों को क्रूरता से ठूंस-ठूंसकर भरा गया था। लेकिन चालक और खलासी ट्रक को छोड़कर भागने में कामयाब रहे। इसी तरह जैतहरी में भी पुलिस ने एक ट्रक पकड़ा, लेकिन वहां भी गुनहगार बच निकले ।

जैतहरी में भी जारी तस्करों का ‘नेटवर्क
भालूमाड़ा की घटना के कुछ ही समय बाद जैतहरी पुलिस ने भी नाकाबंदी कर 22 मवेशियों से भरे एक बिना नंबर के ट्रक को पकड़ा। हालांकि, इस मामले में भी चालक और खलासी दोनों फरार हो गए।


“कहानी का दूसरा पक्ष तस्करों का नेटवर्क या प्रशासन की कमजोरी?”
यह पहली बार नहीं है जब पुलिस ने मवेशियों से भरे ट्रक पकड़े हों, लेकिन तस्कर हमेशा भाग निकलते हैं। यह सवाल खड़ा करता है कि क्या तस्करों का नेटवर्क इतना मजबूत है कि वे हर बार पुलिस से आगे निकल जाते हैं? या फिर पुलिस के जवान से ज्यादा दौड़ते हैं ट्रक ड्राईवर और खलासी
“स्थानीय मदद के बिना संभव नहीं तस्करी”
इतनी बड़ी मात्रा में मवेशियों को ट्रक में लोड करना अकेले ट्रक चालक और खलासी के बस की बात नहीं है। इस बात की प्रबल संभावना है कि उन्हें स्थानीय स्तर पर मदद मिल रही हो। फिर भी, पुलिस की कार्रवाई हर बार केवल ट्रक और मवेशियों की बरामदगी तक सीमित रह जाती है।
कहानी का अंत कब होगा?”
पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति और घटनाओं को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि यह कहानी हर बार वहीं खत्म होती है जहां से शुरू होती है। पुलिस ट्रक पकड़ती है, मवेशियों को बरामद करती है, लेकिन असली गुनहगार भाग खड़े होते हैं। जब तक इस तस्करी रैकेट के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार नहीं किया जाता, यह कहानी अधूरी रहेगी और बार-बार दोहराई जाती रहेगी।
सच्चाई या अधूरी कार्रवाई?”
यह सच्चाई है कि पुलिस अपनी जिम्मेदारी पूरी करने का दावा करती है, लेकिन तस्करों को पकड़ने में असफलता सवाल खड़े करती है। क्या पुलिस की कार्रवाई सतही है, या तस्करों का नेटवर्क पुलिस से एक कदम आगे? यह कहानी तब तक अधूरी है, जब तक असली गुनहगार कानून के शिकंजे में नहीं आते।

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Anuppur
(M.P.)

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