
पुलिस का काम केवल कानून और व्यवस्था बनाए रखना नहीं है, बल्कि समाज के सबसे संवेदनशील पहलुओं को समझकर उसे बेहतर बनाना भी है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया कोतमा पुलिस ने, जिसने अपनी कर्तव्यनिष्ठा, तकनीकी विशेषज्ञता और संवेदनशीलता के माध्यम से तीन अलग-अलग गुमशुदगी के मामलों को सुलझाया। ये सिर्फ कानूनी मामलों का निपटारा नहीं था, बल्कि यह उन परिवारों के लिए एक चमत्कार था, जो अपने प्रियजनों से बिछड़ गए थे।
पुलिस अधीक्षक मोती उर्रहमान के नेतृत्व में यह काम संभव हुआ, जिनकी संवेदनशीलता और निर्देशों ने इस पूरे अभियान को सफल बनाया। यह कार्य पुलिसिंग के एक नए आयाम को बनाती है, बल्कि समाज में पुलिस के प्रति विश्वास को भी मजबूत करती है।

8 मई 2024 को आनंद राम अगरिया ने कोतमा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनकी 15 वर्षीय बेटी बिना बताए घर से कहीं चली गई है। पिता ने यह आशंका जताई कि कोई अज्ञात व्यक्ति उसे बहला-फुसलाकर भगा ले गया हो सकता है। मामला संवेदनशील था और बच्ची की उम्र को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की।
थाना प्रभारी सुंद्रेश सिंह, सहायक उप निरीक्षक विनय सिंह, आरक्षक नरेंद्र, और साइबर सेल के प्रधान आरक्षक राजेंद्र अहिरवार व पंकज मिश्रा की टीम ने अपनी सूझबूझ और तकनीकी सहायता का उपयोग करते हुए, बच्ची को ग्राम कछौड, थाना केल्हारी, जिला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर से दस्तयाब किया।
बच्ची की वापसी के बाद परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं था। यह केवल एक सफल पुलिस कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक परिवार को उसकी खोई हुई मुस्कान वापस देने का प्रयास था।
मार्च 2019 में रवि कुमार साहू ने अपनी पत्नी मीरा साहू की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि 2 मार्च 2019 को उनकी पत्नी बिना बताए घर से चली गई थी। पांच वर्षों तक परिवार अपनी उम्मीदें और आंसू साथ लेकर जी रहा था।
पुलिस ने इस मामले को चुनौती के रूप में लिया। पांच वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, पुलिस टीम ने ग्राम कोसीकला, थाना मथुरा, उत्तर प्रदेश से मीरा साहू को दस्तयाब किया। यह एक ऐसा पल था, जिसने रवि कुमार साहू और उनके परिवार को नई जिंदगी दी।
समय कितना भी लंबा क्यों न हो, सही दृष्टिकोण और मेहनत से हर चुनौती को पार किया जा सकता है।
8 दिसंबर 2021 को राजकुमार चौधरी ने कोतमा पुलिस थाने में अपनी बहन कलावती चौधरी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट के अनुसार, उनकी बहन 6 दिसंबर 2021 को बिना किसी सूचना के घर से गायब हो गई थी।
तीन वर्षों तक पुलिस ने अपने प्रयास जारी रखे। अंततः अमगवां, थाना निवास, जिला मंडला से कलावती चौधरी को सुरक्षित खोज लिया गया।
यह उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो पुलिस से मदद की उम्मीद रखते हैं।
जब नेतृत्व में संवेदनशीलता और समझदारी होती है, तो कोई भी चुनौती असंभव नहीं रहती। उनकी कार्यशैली ने पुलिसिंग को केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे समाज सेवा का एक प्रतीक बना दिया।
कोतमा पुलिस की सफलता गुमशुदा व्यक्तियों को खोजने की बल्कि यह उन परिवारों को जोड़ने की कोशिश है, जो बिछड़ गए थे जब पुलिस अपने कर्तव्यों को मानवता और संवेदनशीलता के साथ निभाती है, तो वह समाज में विश्वास कायम करती है खोए रिश्तों की वापसी, समाज के लिए प्रेरणा बनी जो तीन परिवारों की है, जिनके जीवन में कोतमा पुलिस ने खुशियां लौटाईं।
पुलिस केवल कानून का रखवाला नहीं, बल्कि समाज का सेवक और भरोसे का प्रतीक है।







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