मुख्यालय पर दावेदार और समर्थकों का मेला जिलाध्यक्ष बनाने घमासान जारी

अनुपपुर। (रमाकान्त शुक्ला)
मध्यप्रदेस भाजपा कार्यालय में भाजपा जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर एक तरफ जहां घमासान छिड़ा हुआ है। बीजेपी में ऐसा पहली बार है कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से जिलाध्यक्ष के लिए घमासान मचा है. बड़े नेताओं का जितना दबाव है। क्षेत्रीय भाजपा नेताओ , विधायक,मंत्री और सांसद के बीच आपसी सहमति न बन पाने पर महिलाओं को ज्यादा तवज्जो मिलने की संभावना से इनकार नही किया जा सकता। भोपाल में पार्टी मुख्यालय में बीजेपी संगठन के 60 जिलों में जिलाध्यक्षो के चुनाव की कवायद चल रही है. प्रदेश भर से पर्यवेक्षक और जिला निर्वाचन अधिकारियों को बुलाया गया है. इस बार बीजेपी के 60 जिलों में अनुसूचित जाति के साथ ही महिलाओं को ज्यादा मौका दिया जा सकता है. पार्टी संगठन में मंडल और जिला स्तर पर आधी आबादी की भी बराबर की भागीदारी हो, इस उद्देश्य से उन्हें भी मौका दिए जाने की संभावना है।
अपने खास को जिलाध्यक्ष बनाने मशक्कत जारी
अनुपपुर जिले में भाजपा जिलाध्यक्ष बनाने नेता, मंत्री, सांसद अपने अपने चहेतों के लिए पूरी एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए हैं। सूत्रों की माने तो एक तरफ जहां मंत्री दिलीप जैसवाल द्वारा खुलकर प्रेमचन्द्र यादव के लिए लॉबिंग करने की जनचर्चा है। वही राजनीतिक खेमे में चल रही चर्चाओं की माने तो बिसाहुलाल सिंह किसी के लिए खुलकर नही कह रहे हैं। उनके समर्थकों की माने तो उनका यह भी कहना है कि वो अपने से किसी के लिए नही कह रहे है। कोई यदि उनसे पूंछेगा तभी वह बोलते हैं। ऐसे में बिसाहुलाल सिंह के खास समर्थक सिद्धार्थ सिंह का कॉन्ग्रेस से भाजपा में आने के कारण दावेदारी कमजोर पड़ती नजर आ रही है। वही सांसद हिमाद्रि सिंह का प्रेमचन्द्र यादव व हनुमान गर्ग के पक्ष में खड़े नजर आने के साथ संगठन मंत्री हितानंद शर्मा के भी हनुमान गर्ग के पक्ष में नजर आने की राजनीतिक गलियारों में जनचर्चा है। वही रामअवध सिंह भी अपनी दावेदारी को लेकर जोर लगाए हुए है। जो अपनी दावेदारी को लेकर भोपाल से दिल्ली तक दौड़ लगा चुके है। वही कैबिनेट दर्जा प्राप्त मंत्री रामलाल रौतेल व मंत्री दिलीप जैसवाल के करीबी सम्बंध किसी से छुपे ऐसे में प्रेमचन्द्र यादव की भी दावेदारी को नजर अंदाज नही किया जा सकता।
अनुपपुर मे दुबारा रिपीट नही होंगे जिलाध्यक्ष
कुछ जिलों में जिलाध्यक्ष रिपिट होने की संभावना है, वहां सबसे ज्यादा गहमागहमी है। ऐसे जिलों के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता प्रदेश नेतृत्व के पास जिलाध्यक्षों की शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं। घोषित होने के बाद बदले गए मंडल अध्यक्षों ने भी स्थानीय नेताओं की शिकायत की हैं। मगर अनुपपुर जिले की तस्वीर कुछ अलग ही है।
यहॉ जिलाध्यक्ष के दुबारा रिपीट होने की कोई संभावना नजर नही आ रही है। यहाँ घोषणा के पहले ही जिलाध्यक्ष न बनने देने के लिए शिकायतों की लंबी फेहरिस्त तैयार करके भोपाल पहुंचाई गई है। प्रदेश भर में हुई रायशुमारी के बाद बनाए गए पैनल पर आज प्रदेश भाजपा कार्यालय में जिलेवार वन-टू-वन चर्चा हुई। बीजेपी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा जिला निर्वाचन अधिकारियों से पैनल पर चर्चा करेंगे।
पर्यवेक्षकों ने सौंपे पैनल की सूची
विदित होकि सभी जिलों से आए चुनाव पर्यवेक्षको ने जिलाध्यक्षों का पैनल प्रदेश नेतृत्व को सौंप चुके है। साथ ही जिला निर्वाचन अधिकारी अपने साथ लाए जिलाध्यक्षों की पैनल भी प्रदेश नेतृत्व को सौंप रहे हैं. जिनसे फिल्टर होकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचने के बाद अंतिम रूप से जिलाध्यक्षों की चुनाव प्रक्रिया पूरी होगी. लेकिन जोर-आजमाइश पूरी तरह जारी है. पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता यशपाल सिंह सिसौदिया कहते हैं “पार्टी पारदर्शी तरीके से मंथन कर रही है और इस बार हर वर्ग को मौका दिया जाएगा. जब सूची आएगी तो आप देखेंगे कि हर वर्ग की भागीदारी है।
मुख्यालय पर दावेदारों का मेला
भोपाल में बीजेपी मुख्यालय में अमूमन ऐसी रौनक विधानसभा या लोकसभा चुनाव के दौरान ही होती है. जिलाध्यक्ष पद के लिए ऐसी मारामारी पहली बार है. वैसे प्रदेश भर से जिला पर्यवेक्षक और जिला निर्वाचन अधिकारियों को ही आमंत्रित किया गया है. लेकिन जिला अध्यक्ष पद के दावेदारों के साथ शिकायतों का पुलिंदा लिए कार्यकर्ता भी पहुंचे हैं. बीजेपी मुख्यालय में संगठन चुनाव पर्यवेक्षक सरोज पांडे, राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, प्रदेश प्रभारी डॉ.महेन्द्र सिंह, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा हर जिले से आए चुनाव पर्यवेक्षक, जिला निर्वाचन अधिकारी से वन टू वन चर्चा कर रहे हैं।
घमासान जारी, 5 जनवरी को हो सकती है घोषणा
सूत्रों की माने तो इस दौड़ में अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र मरावी गुपचुप तरीके से दिल्ली से अपनी घोषणा कराने के जुगाड़ में हैं। हालांकि फिलहाल आदिवासी जिलाध्यक्ष के दुबारा बनने की संभावना नजर नही आ रही है। किसके सितारे बुलंद हो यह कोई नही जानता जनचर्चा है यदि सांसद श्रीमती हिमाद्रि सिंह व मंत्री दिलीप जैसवाल की चली तो प्रेमचन्द्र यादव जिलाध्यक्ष बन सकते हैं। वही सूत्रों की माने तो इस बार न अनुसूचित जाति से और न ही पिछड़ा से जिलाध्यक्ष बनने की कोई संभावना नजर नही आ रही है। ऐसे में अंतिम समय में यदि संगठन ने कोई परिवर्तन नही किया तो सामान्य से रामअवध सिंह या हनुमान गर्ग में से किसी एक के जिलाध्यक्ष बनने की प्रबल संभावना से इंकार नही किया जा सकता।



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