वाराणसी के जाने-माने साहित्यकार श्रीनाथ खंडेलवाल, जिन्होंने 82 वर्ष के जीवन में 400 से अधिक किताबें लिखीं और 80 करोड़ की संपत्ति अर्जित की, का वृद्धाश्रम में निधन हो गया। अपने अंतिम दिनों में वह अकेले थे। बेटा और बेटी, जो उच्च पदों पर कार्यरत हैं, उनके अंतिम संस्कार में भी नहीं पहुंचे। बाहरी लोगों ने उनका दाह-संस्कार किया।
साहित्यकार का जीवन और अकेलापन, साहित्य का जुनून और परिवार की अनदेखी
श्रीनाथ खंडेलवाल अपने साहित्य के प्रति इतने समर्पित थे कि उन्होंने अपने जीवन का हर क्षण पुस्तकें लिखने में लगा दिया। उनके घर की दीवारें किताबों से भरी रहती थीं। पत्नी हमेशा शिकायत करतीं कि वह बच्चों को समय नहीं देते।
एक दिन का दृश्य:
पत्नी: “आपको कभी अपनी किताबों से समय मिलेगा भी? बच्चों के साथ थोड़ी देर बैठें, उन्हें आपके समय की जरूरत है।”
श्रीनाथ (मुस्कुराते हुए): “बच्चे बड़े हो रहे हैं। मेरे पास यह काम अधूरा छोड़ने का वक्त नहीं। वे समझेंगे।”
परिवारिक दरार: बेटा-बेटी का अलग होना
समय के साथ बेटा, जो एक व्यवसायी बन गया, और बेटी, जो सुप्रीम कोर्ट में वकील बनीं, अपने-अपने करियर में व्यस्त हो गए। पारिवारिक विवाद, संपत्ति को लेकर झगड़े, और भावनात्मक दूरी ने श्रीनाथ को अकेला कर दिया।
अकेलेपन का दर्द: वृद्धाश्रम में जीवन
मार्च 2024 में, श्रीनाथ खंडेलवाल वाराणसी के ‘काशी कुष्ठ सेवा संघ वृद्धाश्रम’ में रहने लगे।
उनके पास उनकी लिखी किताबें थीं, लेकिन परिवार का साथ नहीं।
वह वृद्धाश्रम में भी एक अनुवाद कार्य में लगे रहे, लेकिन वह अधूरा रह गया।
श्रीनाथ: “इतनी संपत्ति, इतना ज्ञान, लेकिन आज मुझे कंधा देने वाला भी मेरा अपना नहीं।”
वृद्धाश्रम कर्मचारी: “आपके बच्चे क्यों नहीं आते?”
श्रीनाथ (आंसुओं से भरी आंखों से): “शायद मैंने उनके लिए कभी समय नहीं निकाला।”
श्रीनाथ खंडेलवाल का निधन 28 दिसंबर 2024 को वृद्धाश्रम में हुआ। उनके बेटे और बेटी ने उनके अंतिम संस्कार में हिस्सा नहीं लिया। वृद्धाश्रम के अन्य सदस्यों ने मिलकर उनका दाह-संस्कार किया।
गंगा घाट का दृश्य:
गंगा की लहरों के बीच उनका शरीर अंतिम संस्कार के लिए रखा गया। आसपास के लोग उनकी कहानी सुनकर भावुक हो गए।
श्रीनाथ ने अपने परिवार से ज्यादा अपने काम को महत्व दिया, जिससे बच्चे उनसे भावनात्मक रूप से दूर हो गए।
संपत्ति को लेकर विवाद भी रिश्तों के टूटने का कारण बना।
अहम और संवाद की कमी
श्रीनाथ को लगा कि उनका योगदान परिवार से ऊपर है, जबकि बच्चों को पिता के स्नेह की कमी खली
श्रीनाथ खंडेलवाल की कहानी केवल एक साहित्यकार की नहीं, बल्कि उन सभी परिवारों की है, जहां रिश्ते काम और महत्वाकांक्षाओं के बोझ तले टूटते जा रहे हैं। उनकी किताबें हमेशा याद की जाएंगी, लेकिन उनका अकेलापन समाज के लिए एक चेतावनी है।
“संपत्ति, ज्ञान और उपलब्धियों का कोई मोल नहीं, अगर आपके अपने ही आपके साथ न हों।”
काशी के करोड़पति साहित्यकार का वृद्धाश्रम में हुआ निधन, सम्पत्ति हड़पकर घरसे निकाले गये थे, अंतिम संस्कार में भी नहीं आया परिवार

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