

संबंधित द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार बैंक अधिकारी से मारपीट मामले में चार पुलिसकर्मियों और पत्नी पर मामला दर्ज, हाईकोर्ट ने झूठी FIR को किया खारिज
शहडोल जिले में बैंक अधिकारी डॉ. संत कुमार नामदेव के साथ पुलिस और उनकी पत्नी द्वारा की गई कथित मारपीट और झूठे मामले दर्ज कराने का प्रकरण अदालत में गूंजा। पन्ना जिले की प्रथम श्रेणी न्यायालय के न्यायाधीश श्री प्रीतम शाह ने 17 दिसंबर 2024 को इस मामले में संज्ञान लेते हुए आरोपियों को समन जारी किया।
बैंक अधिकारी डॉ. संत कुमार नामदेव का उनकी पत्नी लक्ष्मी नामदेव और साले श्रीकांत नामदेव से विवाद चल रहा था। मामला तब बढ़ा जब डॉ. नामदेव ने अपने साले पर फर्जी हस्ताक्षर कर कार ट्रांसफर कराने और पुलिस तथा इनकम टैक्स पद के प्रभाव का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।
डॉ. नामदेव ने तत्कालीन एसपी धर्मराज मीना के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कार्रवाई न होने पर उन्होंने मीडिया में बयान दिया। इसके बाद एसपी कार्यालय के कर्मचारियों और पुलिस अधिकारियों ने डॉ. नामदेव पर मारपीट और शासकीय कार्य में बाधा का मामला दर्ज कर लिया।
हाईकोर्ट की कार्रवाई
डॉ. नामदेव ने इस मामले को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में चुनौती दी।
हाईकोर्ट का निर्णय उच्च न्यायालय ने जांच के दौरान पाया कि बैंक अधिकारी के खिलाफ दर्ज मामला तथ्यों से परे और दुर्भावनापूर्ण था। अदालत ने एसपी ऑफिस में दर्ज एफआईआर को निरस्त कर दिया।
सीसीटीवी सबूत
बैंक अधिकारी ने मारपीट की घटना के सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेज आरटीआई के माध्यम से मांगे थे।
पुलिस द्वारा इन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसे कोर्ट ने गंभीर लापरवाही माना।
प्रथम श्रेणी न्यायालय की सुनवाई
बैंक अधिकारी ने पुलिस महानिदेशक और अन्य अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। कार्यवाही न होने पर उन्होंने पन्ना की प्रथम श्रेणी न्यायालय में मामला दायर किया।
न्यायालय ने डॉ. नामदेव की याचिका को गंभीरता से लिया और आरोपी पुलिसकर्मियों (सरिता तिवारी, राहुल यादव, रामकृष्ण पांडे, अरुण कुमार मुंशी) और उनकी पत्नी को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया।
मामले की मुख्य बातें झूठी दहेज प्रताड़ना शिकायत
डॉ. नामदेव की पत्नी ने बुढ़ार थाना पहुंचकर बैंक अधिकारी और उनके परिवार के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराई।
यह घटना उसी दिन हुई, जब बैंक अधिकारी को एसपी ऑफिस में मारपीट के मामले में फंसाया गया।
अधिकारों का दुरुपयोग
डॉ. नामदेव ने आरोप लगाया कि उनके साले श्रीकांत नामदेव, जो इनकम टैक्स विभाग में कार्यरत हैं, ने अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए कई झूठे मामले दर्ज कराए।
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में टिप्पणी करते हुए “पद और अधिकार के दुरुपयोग” पर चिंता व्यक्त की।
कानूनी लड़ाई
बैंक अधिकारी ने स्वयं जिला और उच्च न्यायालय में अपनी पैरवी शुरू कर दी।
उन्होंने अदालत में सीसीटीवी और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य पेश करने की मांग की, जिसे पुलिस ने न तो सुरक्षित रखा और न ही प्रस्तुत किया।
माननीय न्यायालय ने आरोपियों की संलिप्तता पर संज्ञान लेते हुए उन्हें समन जारी किया है।
उच्च न्यायालय के निर्णय ने बैंक अधिकारी पर दर्ज झूठी एफआईआर को निरस्त कर दिया।
प्रथम श्रेणी न्यायालय के आदेश से यह मामला और गंभीर हो गया है, जिससे पुलिस अधिकारियों और अन्य आरोपियों को अदालत में जवाब देना होगा।
यह मामला न केवल व्यक्तिगत संघर्ष बल्कि पुलिस और प्रशासनिक तंत्र के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण है। उच्च न्यायालय और प्रथम श्रेणी न्यायालय द्वारा लिए गए फैसले न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास को स्थापित करते हैं।
बैंक अधिकारी का संघर्ष अन्याय के खिलाफ एक मिसाल है, जिसमें उन्होंने न्याय के लिए पूरी कानूनी लड़ाई खुद लड़ी।





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