
‘एक देश, एक चुनाव’ के लिए गठित जेपीसी में मध्य प्रदेश के खजुराहो से सांसद विष्णु दत्त शर्मा शामिल
भारत में ‘एक देश, एक चुनाव’ के मुद्दे पर बनी विशेष संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में मध्य प्रदेश के खजुराहो से भाजपा के सांसद विष्णु दत्त शर्मा को एक बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। यह समिति लोकसभा और राज्यसभा के कुल 31 सदस्यों से मिलकर बनी है, जिनमें से 21 सदस्य लोकसभा से और 10 सदस्य राज्यसभा से हैं।
जेपीसी के सदस्यों के नाम और उनके राजनीतिक व्यंग:
विष्णु दत्त शर्मा (भा.ज.पा.) – खजुराहो, मध्य प्रदेश से सांसद। बीजेपी के वरिष्ठ नेता, जिनकी जिम्मेदारी ‘एक देश, एक चुनाव’ के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। उन्हें ‘संगठन का दिग्गज’ माना जाता है।किरण रिजिजू (भा.ज.पा.) – केंद्रीय कानून मंत्री और राज्यसभा सदस्य। उनके राजनीतिक जीवन को ‘कानून और संविधान के रक्षक’ के रूप में देखा जाता है।शशि थरूर (काँग्रेस) – तिरुवनंतपुरम से सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, जिनकी टिप्पणियां और भाषण अक्सर चर्चा में रहते हैं। वह ‘विवादों के बादशाह’ माने जाते हैं।
मनीष तिवारी (काँग्रेस) – पंजाब से कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री। उन्हें ‘विपक्ष की आवाज’ के रूप में जाना जाता है।
तेजस्वी यादव (राजद) – बिहार से राजद के नेता, जिनकी राजनीति ‘युवाओं की उम्मीद’ और ‘पारिवारिक राजनीति’ से जुड़ी हुई है।
अनंत कुमार हेगड़े (भा.ज.पा.) – कर्नाटक से भाजपा के सांसद, जिनकी राजनीति को ‘हिंदुत्व का झंडाबरदार’ के रूप में देखा जाता है।
पार्थ चटर्जी (टीएमसी) – पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस के नेता, जो पश्चिम बंगाल के राजनीतिक दिग्गज माने जाते हैं। उनकी राजनीति ‘राज्य के तंत्र का किला’ मानी जाती है।
सुप्रिया सुले (एनसीपी) – महाराष्ट्र से एनसीपी नेता, जो राजनीति में अपनी ‘परिवारिक विरासत’ को लेकर प्रमुखता से जानी जाती हैं रविशंकर प्रसाद (भा.ज.पा.) – बिहार से भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री, जिनका प्रभाव ‘संविधानिक न्याय’ में गहरा है।
जयराम रमेश (काँग्रेस) – कर्नाटका से कांग्रेस के नेता, जिनकी नीतियां ‘आर्थिक सुधार’ और ‘संविधान का उल्लंघन’ के मामलों में प्रमुख रही हैं।
जेपीसी ‘एक देश, एक चुनाव’ रिपोर्ट कैसे तैयार करेगी:
जेपीसी की जिम्मेदारी होगी कि वह ‘एक देश, एक चुनाव’ के प्रस्ताव की संभावनाओं, लाभों और चुनौतियों की गहनता से जांच करे। समिति निम्नलिखित पहलुओं पर विचार करेगी:संविधान में बदलाव की आवश्यकता: एक देश, एक चुनाव के लिए कौन से संवैधानिक बदलाव आवश्यक होंगे, इस पर चर्चा होगी। समिति यह देखेगी कि इस बदलाव से चुनावी प्रक्रिया पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
आर्थिक और प्रशासनिक पहलु एक साथ चुनावों के आयोजन से होने वाले खर्च और प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। इसके तहत सरकार की तैयारियों और संभावित समस्याओं पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
राजनीतिक दलों की भूमिका: समिति यह भी जांचेगी कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए एक साथ चुनाव कितना उपयुक्त होगा, और क्या इससे चुनावी प्रक्रिया पर कोई अनुकूल या प्रतिकूल असर पड़ेगा।
लोकतंत्र पर प्रभाव समिति यह भी जानने की कोशिश करेगी कि क्या ‘एक देश, एक चुनाव’ का निर्णय भारतीय लोकतंत्र के लिए सही रहेगा और क्या यह जनहित में होगा।
तंत्र की स्थिरता समिति चुनावों के समय में विभिन्न राजनीतिक दलों और सरकारों के बीच स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर विचार करेगी, जिससे देश में कोई अस्थिरता न फैले।
यह रिपोर्ट भारतीय राजनीति और संविधान के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा निर्धारित करने में मदद करेगी और भविष्य में चुनाव प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा ।





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