
कांग्रेस की संगठन बैठक या अखाड़ा? जूतम-पैजार के बाद इंदौर बना चर्चा का केंद्र
इंदौर। कांग्रेस की संगठनात्मक बैठकें अब नीतियों पर चर्चा के बजाय जूते-चप्पलों के प्रदर्शन का मंच बनती जा रही हैं। गांधी भवन में आयोजित इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-2 की बैठक में नेताओं ने अपनी पुरानी परंपरा को कायम रखते हुए प्रभारियों के सामने ही जूतम-पैजार शुरू कर दी। थाने, मेडिकल और समझौते के बाद अब बैठक के मुद्दे की बजाय मारपीट की कहानियां सुर्खियां बटोर रही हैं।
कांग्रेस में लोकतंत्र है, और यह जूतों में बसता है!
नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे और यूथ कांग्रेस आईटी सेल प्रभारी दीपक सोनवाने के बीच कहासुनी से शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते जूतों और चप्पलों की बरसात में बदल गया। आरोप-प्रत्यारोप की आग तब भड़की जब एक कार्यकर्ता बसंत पाटिल ने चौकसे पर निगम से “बंधा हुआ पैसा” लेने का आरोप लगाया।
चिंटू चौकसे ये तो परिवार का मामला है!
जूते खाने और मारपीट के बावजूद चौकसे इसे “परिवार का मामला” बता रहे हैं। ऐसा लगता है कि कांग्रेस का यह परिवार अब ‘फैमिली ड्रामा’ का पर्याय बन गया है। दूसरी ओर, दीपक सोनवाने का कहना है कि चिंटू ने उनके टिकट कटवाने की पुरानी खुन्नस निकाली। सोनवाने ने तो यह भी आरोप लगाया कि चौकसे उन्हें धमकी देते हैं कि “घर से उठवा लेंगे!
थाने का तात्कालिक डेमोक्रेसी सेंटर
पंढरीनाथ थाना प्रभारी कपिल शर्मा ने दोनों पक्षों का मेडिकल कराकर मामला “समझौता मोड” पर डाल दिया। चोटें जरूर लगीं, लेकिन दिलों की खरोंचें गहरी हैं। अब थाने में “सहमति” का डेमोक्रेसी सत्र चल रहा है, जहां राजनीति के ‘शांति प्रयास’ जारी हैं।
कांग्रेस का नया नारा – ‘जूते मारो, समझौता करो!
कांग्रेस की बैठकें अब किसी पॉलिसी बनाने से ज्यादा जुड़वा फिल्मों के एक्शन सीन की तरह हो गई हैं। हर महीने बंधा पैसा हो या टिकट कटवाने की खुन्नस, बहस का अंत हमेशा जूते-चप्पलों के शंखनाद से होता है। गांधीजी के नाम पर चलने वाली पार्टी के नेता अब मानो गांधी भवन में ‘गांधी के तीन बंदरों’ के बजाय ‘तीन जूतों’ का आदर्श प्रस्तुत कर रहे हैं।
इंदौर की जनता अब चकित है—क्या कांग्रेस की अगली बैठक में प्रोटोकॉल में जूतों का रंग तय होगा? या फिर हर सदस्य को हेलमेट पहनकर बैठना होगा?




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