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खुशियों की नई राह पंकज की जिंदगी में आई रफ्तार

खुशियों की नई राह पंकज की जिंदगी में आई रफ्तार



उमरिया, 3 दिसंबर 2024।
उमरिया जिले के सामुदायिक भवन में इस बार विश्व दिव्यांग दिवस का माहौल कुछ खास था। हर चेहरा मुस्कान से दमक रहा था, और वातावरण में सकारात्मकता का संचार था। दिव्यांगजन के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में जब पंकज कुमार मिश्रा को मोटराईज्ड ट्रायसिकिल सौंपी गई, तो वह क्षण मानो उनकी जिंदगी में एक नई रोशनी लेकर आया।
असंभव से संभव तक का सफर
पंकज, गोवर्दे गांव के निवासी, एक साधारण से अतिथि शिक्षक हैं, जो दुलहरा माध्यमिक स्कूल में पढ़ाते हैं। लेकिन उनके लिए यह सफर साधारण नहीं था। स्कूल पहुंचने के लिए हर दिन उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। उनका संघर्ष न केवल उनके शारीरिक सीमाओं से था, बल्कि सामाजिक परिस्थितियों से भी।
उन्होंने बताया, “मैंने कई बार सोचा कि इस हालत में मुझे स्कूल जाना छोड़ देना चाहिए। लेकिन बच्चों के भविष्य और मेरी शिक्षा के प्रति जुनून ने मुझे रुकने नहीं दिया।”
मोटराईज्ड ट्रायसिकिल का संजीवनी रूप
पिछले महीने मानपुर में आयोजित एक सामाजिक न्याय शिविर में उन्होंने मोटराईज्ड ट्रायसिकिल के लिए आवेदन दिया था। यह आवेदन उनके लिए किसी उम्मीद की किरण से कम नहीं था। उनकी उम्मीदें तब हकीकत में बदलीं, जब विश्व दिव्यांग दिवस पर, उमरिया के विधायक शिवनारायण सिंह, कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन, और जिला पंचायत अध्यक्ष अनुजा पटेल ने उन्हें ट्रायसिकिल प्रदान की।
जैसे ही पंकज को ट्रायसिकिल और हेलमेट सौंपा गया, उनकी आंखों में आंसू थे। यह आंसू खुशी के थे, संघर्ष और सफलता के थे। “अब मैं स्कूल आसानी से जा सकूंगा। बच्चों को पढ़ाने के लिए समय पर पहुंचना मेरे लिए मुमकिन होगा। यह ट्रायसिकिल मेरे लिए वरदान है,” उन्होंने कहा।
जीवन में आई नई रफ्तार
मोटराईज्ड ट्रायसिकिल ने न केवल पंकज के सफर को सरल बनाया, बल्कि उनके सपनों को एक नई उड़ान दी। अब वह आत्मनिर्भर होकर अपने कर्तव्यों को निभाने में सक्षम हैं। यह ट्रायसिकिल उनकी जिंदगी का एक अभिन्न हिस्सा हो गई । जो उनके रोजमर्रा के जीवन को सहज बनायेगी।
आभार और उम्मीद की नई किरण
पंकज ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “यह कदम न केवल मेरी जिंदगी बदल देगा, बल्कि समाज के अन्य दिव्यांग जनों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।”
जीवंत माहौल और खुशियों की गूंज
कार्यक्रम स्थल पर तालियों की गूंज, पंकज के चेहरे पर खुशी की चमक और समाज के प्रति उनका आभार—यह सब एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। उपस्थित लोगों के लिए यह सिर्फ एक ट्रायसिकिल वितरण कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह उमरिया में समर्पण और सेवा का जीवंत उदाहरण था।
सही समय पर किया गया प्रयास और प्रशासन की संवेदनशीलता किसी की जिंदगी को कैसे बदल सकती है। यह केवल पंकज की नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की कहानी है, जो संघर्षों के बीच उम्मीद का दामन थामे आगे बढ़ता है

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