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राजा विक्रमादित्य की धरती को मिलेगी नई पहचान, सिंहस्थ 2028 की योजना

राजा विक्रमादित्य की धरती को मिलेगी नई पहचान, सिंहस्थ 2028 की योजना

सिंहस्थ 2028 उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संजोने की भव्य कार्ययोजना की समीक्षा बैठक
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में भव्य कार्ययोजना का प्रस्तुतीकरण हुआ। जेपी नड्डा ने इसे “शानदार और दूरदर्शी योजना” बताते हुए उज्जैन की धार्मिक, सांस्कृतिक, और पौराणिक विरासत को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने वाला बताया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने क्षिप्रा नदी को प्रवाहमान और स्वच्छ बनाने, गौशालाओं के निर्माण, और स्थायी घाटों के विकास की योजनाओं पर जोर दिया। सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 29 किमी लंबे घाट, रोपवे, हेलिपैड, रेलवे स्टेशन उन्नयन, और फोरलेन सड़कों का निर्माण किया जाएगा।
कान्ह डायवर्शन और सेवरखेडी परियोजनाओं के तहत शिप्रा नदी को पवित्र और निरंतर प्रवाहमान बनाए रखने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इन परियोजनाओं की कुल लागत 2300 करोड़ रुपये से अधिक होगी। इसके अलावा, महाकालेश्वर मंदिर तक रोपवे निर्माण, मेडिकल हब, और आईटी पार्क जैसी योजनाएं भी उज्जैन के विकास को नया आयाम देंगी।
जेपी नड्डा ने कहा, “यह कार्ययोजना राजा विक्रमादित्य की अवंतिका को उसके पुरातन वैभव की ओर ले जाएगी।” सिंहस्थ 2028 के लिए यह योजना श्रद्धालुओं और उज्जैन के समग्र विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

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