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संबल योजना असंगठित श्रमिकों के लिए जीवन का आधार

संबल योजना असंगठित श्रमिकों के लिए जीवन का आधार

उमरिया मुख्यमंत्री जन कल्याण (संबल) योजना ने उमरिया जिले के असंगठित श्रमिकों के जीवन में नई उम्मीद की किरण जगाई है। वर्ष 2018 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना और कठिन समय में उनके परिवारों को आर्थिक सहारा देना है।उमरिया जिले में संबल योजना से हजारों परिवारों को मिली नई दिशा बदल दी जिंदगी ।
एक वर्ष की उपलब्धियां

दुर्घटना मृत्यु सहायता: 41 लाभार्थियों को ₹4 लाख प्रति व्यक्ति के हिसाब से कुल ₹1.64 करोड़ स्वीकृत किए गए।
सामान्य मृत्यु सहायता: 349 हितग्राहियों को ₹2 लाख प्रति व्यक्ति के हिसाब से कुल ₹6.98 करोड़ प्रदान किए गए।
अंत्येष्टि सहायता: 390 श्रमिक परिवारों को ₹5,000 प्रति व्यक्ति के हिसाब से ₹19.50 लाख दिए गए।
योजना के लाभ
संबल योजना के तहत असंगठित श्रमिकों को विभिन्न श्रेणियों में सहायता दी जाती है
अंत्येष्टि सहायता: ₹5,000

सामान्य मृत्यु: ₹2 लाख

दुर्घटना मृत्यु: ₹4 लाख

आंशिक दिव्यांगता: ₹1 लाख

स्थाई दिव्यांगता: ₹2 लाख
हितग्राहियों की राय
लाभार्थियों ने इस योजना को घर के मुखिया के समान सहारा बताते हुए इसे “मील का पत्थर” करार दिया। एक लाभार्थी ने कहा, “हमारी कठिनाइयों को समझते हुए सरकार ने हमें इस योजना के माध्यम से आर्थिक और भावनात्मक मदद दी है।”
मुख्यमंत्री जन कल्याण संबल योजना ने उमरिया जिले में जरूरतमंदों के आंसू पोछने का जो प्रयास किया है, वह न केवल आर्थिक सहायता है बल्कि श्रमिक वर्ग के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक भी है।
संबल योजना आशा की नई कहानी
यह पहल न केवल असंगठित श्रमिकों के जीवन को बेहतर बना रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी प्रेरित कर रही है। यह दिखाता है कि राज्य सरकार कैसे समाज के हर वर्ग का ख्याल रख रही है
“संबल योजना सिर्फ एक योजना नहीं, हर श्रमिक परिवार के लिए उम्मीद का सहारा है।”

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Kailash Pandey
Anuppur
(M.P.)

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