

उज्जैन।
जमीन की धूल फांकने वालों ने ऐसी ‘जमींदारी’ शुरू की कि भोपाल की जमीन को उज्जैन में बैठकर बेचने का खेल रच डाला। लेकिन उनका यह खेल उज्जैन पुलिस के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा के एक्शन मोड में आते ही खत्म हो गया।
राजस्थान से लेकर इंदौर तक के डमी दलाल और नकली जमीन मालिक इस गिरोह में शामिल थे। पीड़िता महिला ने जब पुलिस के दरवाजे खटखटाए, तो sp ने बिना देरी किए भूमाफियाओं पर कार्रवाई शुरू कर दी। इस केस में 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें एक कथित हिंदूवादी नेता भी है, जो असल में जमीन कब्जाने का ‘जमीनवादी’ मास्टरमाइंड निकला।
कैसे रची गई थी साजिश?
भोपाल निवासी अशोक सकलेचा की उज्जैन के मानपुर में आठ बीघा जमीन थी। इंदौर की महिला, जो पीड़ित है, उसके रिश्तेदार इरफान ने जमीन का सौदा करवाने का झांसा दिया। उसने कोटा और इंदौर से नकली दलाल तैयार किए और जमीन 8 करोड़ की बताकर सौदा पक्का करवा दिया। रजिस्ट्री तक हो गई, लेकिन जैसे ही पूरा भुगतान चेक से होना था, धोखाधड़ी का पर्दाफाश हो गया।
गिरोह में शामिल हर शख्स ने एक खास भूमिका निभाई। कोई डमी जमीन मालिक बना, तो कोई नकली दलाल। पुलिस ने इनके पास से फर्जी आधार कार्ड, 28 लाख रुपए, हथियार, और जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।
पुलिस की कार्रवाई और भूमाफिया की शामत
जैसे ही पीड़िता ने सिंघम के पास अपनी कहानी सुनाई, पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। राजस्थान के कोटा और इंदौर से डमी दलालों को उठाया गया। गिरोह का एक सदस्य, जो पूर्व हिंदूवादी नेता राकेश कटारिया है, के पास से हथियार भी मिले।
सिंघम ने स्पष्ट कर दिया है कि जमीन पर कब्जा करने या धोखाधड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी संगठन से क्यों न हो
“जमीन के दलाल और नकली जमींदार नया रोजगार!”
इन जालसाजों ने रोजगार का एक नया तरीका खोज निकाला है। डमी दलाल बनाकर दूसरों की जमीन को ऐसे बेचते हैं, जैसे खुद ‘मंगल ग्रह’ से लाए हों।
रिश्तेदारों का अनोखा प्यार”
इस केस में रिश्तेदार ने रिश्तेदारी का मतलब ही बदल दिया। “रिश्तेदार का मतलब: धोखा भी मिलेगा और जमीन भी जाएगी।”
“हिंदूवादी नेता या जमींदार का डाकू?”
भूमाफिया के गिरोह में हिंदूवादी नेता की एंट्री ने यह तो साफ कर दिया कि राजनीति और जमीन कब्जाने में ज्यादा फर्क नहीं बचा है।
आठ बीघा जमीन और आठ करोड़ का सपना”
इतने बड़े सपने देखना कोई इनसे सीखे। जमीन बेचने का ऐसा ताना-बाना बुनते हैं, जैसे खुद भगवान ने इन्हें ‘संपत्ति प्रबंधन’ का वरदान दिया हो।फर्जी आधार, असली धोखाधड़ी”
इन जालसाजों ने साबित कर दिया कि फर्जी दस्तावेज बनाना कला है, जिसे ये मास्टरडिग्री की तरह पेश करते है
पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने कहा है कि चाहे कोई भूमाफिया कितना ही शातिर क्यों न हो, उज्जैन पुलिस की नजर से बच नहीं सकता। फर्जीवाड़े का खेल खेलने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
“जमीन अपनी, लेकिन सपना जालसाजों का!”
इस पूरी घटना ने यह सिखाया कि जमीन खरीदते समय सावधानी बरतें। नकली दलालों और जालसाजों से बचने के लिए कागजात की पूरी जांच कराएं। उज्जैन पुलिस ने अपनी मुस्तैदी दिखाते हुए इस गिरोह को धर दबोचा और लोगों को एक बड़ी ठगी से बचाया।







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