









जबलपुर। सरकार कुपोषित बच्चों को स्वस्थ बनाने पर जोर देने के दावे करते नहीं थक रही है,लेकिन महिला बाल विकास के आंकड़े शर्मसार करने वाले हैं। आंकड़ों मुताबिक, एक कुपोषित बच्चे पर रोजाना सिर्फ 12 रुपये खर्च हो रहे हैं। जबलपुर जिले में भी इतनी ही राशि खर्च की जा रही है। सवाल उठ रहा है कि आखिर इस राशि के बदले बच्चों को पोषण मिल पा रहा है या ये एक धोखे की कहानी है। जबलपुर जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या 19 सौ 2 है। वहीं मध्यम कुपोषित बच्चों की संख्या 9 हजार 2 सौ 43 हैं।
–मध्यम कुपोषित बच्चों का और भी बुरा हाल
प्रदेश सरकार अभी अति कम वजन बच्चों के प्रतिदिन के पोषण आहार पर मात्र 12 रूपए खर्च कर रही है। वहीं मध्यम कुपोषित बच्चों को 8 रुपए रोज का आहार दिया जाता है। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी एमएल मेहरा ने बताया कि कुपोषण दूर करने के लिए विभाग निरंतर प्रयास कर रहा है। आंगनबाड़ी स्तर पर भी लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा हैं। उनका कहना है कि कुपोषण में सिर्फ सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन की बात नहीं रहती है, इसके अलावा माता-पिता को भी जागरूक करने की जरूरत है। विभाग द्वारा पोषण पखवाड़े के जरिए जागरूक किया जाता हैं।
-मनमोहन नगर पोषण केंद्र में 16 बच्चे भर्ती
जिला चिकित्सालय विक्टोरिया के सिविल सर्जन मनीष मिश्रा ने बताया कि फिलहाल मनमोहन नगर कुपोषण केंद्र में कुपोषित बच्चों के लिए 20 बेड हैं। जिसमें 16 बच्चे भर्ती हैं। इन सभी बच्चों का खास ख्याल रखा जा रहा है। कोशिश की जा रही है कि जल्द से जल्द इन बच्चों का कुपोषण दूर किया जाए।
–योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी कोताही
जबलपुर जिले में लगभग 2 हजार 4 सौ 86 आंगनवाड़ी केंद्र हैं, जिसमें कार्यरत आशा-उषा कार्यकर्ताओं सहित महिला बाल विकास विभाग द्वारा कुपोषण से बचाव के प्रति जागरूक करने अभियान चलाने का दावा किया जाता है लेकिन इसके बावजूद भी अति कम वजन और कम वजन के बच्चों की संख्या में हो रहा इजाफा, इस बात का संकेत है कि शासन द्वारा कुपोषण से निपटने के लिए चलाई जा रही योजनाओं का क्रियान्वयन करने में कोताही बरती जा रही हैं।





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